Tota Maina Ki kahani- तोता ने फर्ज निभाते हुए दे दिया अपनी जान..

Tota Maina Ki kahani तो पुरानी हो गई लेकिन आज भी लोग पढ़ना पसंद करते है ! वैसे तो तोता और मैना अलग -अलग प्रजाति के है लेकिन इनके प्यार भरे चर्चे तोता मैना कि कहानियो में होते रहते है | एक खास बात और तोता और मैना रंग रूप अलग होते हुए भी इनकी शारीरिक बनावट और आकर-प्रकार एक जैसा है | चलिए हम कहानी की तरफ चलते है कि क्या कहानी है ?

Tota Maina Ki kahani

दूर पहाड़ियों पर पर एक बड़ा विशाल वृक्ष था | जहा एक तोता (male)और मैना (Female) का जोड़ा रहता था “ख़ुशी-खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे ” तोता दिन में भोजन की तलाश में जाया करता था और मैना घर की रखवाली करती थी |

Tota-maina-ki-kahani in hindi
tota maina ki kahani

कुछ दिनों बाद उनके यहाँ एक बच्चा पैदा होता है जो बहुत ही सुन्दर था ! जिसकी रखवाली मैना दिन भर घर पर रह के करती थी और तोता भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकता रहता था |

परिवार की बेड़िया उसके पैरो में पड़ी थी लेकिन मैना को लगता था की तोता लापरवाह है और तो और तोते का बेटा भी पापा उसको लापरवाह कहता था जिसने अभी ” ठीक से चलना भी नहीं सीखा था | “

तोता मैना की कहानी | Jadui Tota |

एक दिन भोजन की तलाश में निकला तोता शाम को घर लौटते समय पहाड़ी की चोटी से टकरा जाता है जिससे उसके पेर जख्मी हो जाते है |

किसी तरह थका-हारा घर पहुँचता है ! तोते की ये हॉल देख मैना उसको भला-भूरा सुनती है | कि तुम अंधे हो तुम्हे दिखाई भी नहीं देता एक भी काम ढंग से नहीं कर सकते हो ” आज तोता पहली बार अंदर से टूट चूका था ” जख्मी पैर लेकर वह और भी परेशान था |

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अगले दिन मौसम ख़राब था ! जिसे देख तोता ने भोजन की तलाश में न जाने का निर्णय लिया जिसे सुन मैना बोली ” तुम्हारे बस की बात नहीं घर परिवार चलना ” आज से मैं जाउंगी तुम अब रहने ही दो |

तोता ने मैना को मौसम ख़राब का हवाला दिया और उसे भी रोकने की भरकस कोशिस की लेकिन मैना ने उसकी एक न सुनि | मैना दूर जंगलो में भोजनतलास के लिए निकल गयी तोता अपने बच्चे की रखवाली कर रहा था घोषले के पास |

Tota Maina Ki Kahani|Parrot Ki Kahani

शाम होने को थी तभी अचानक घनघोर घटा ,काले बदलो ने दस्तक दे दी जैसे मानो कोई बड़ा तूफान आने वाला है |

Tota-Maina-Ki-kahani
parrot ki kahani

तोता मानो सहम सा गया था उसे अपने बच्चे की चिंता हो रही थी उसका घोसला खुले आसमां में था “पैरो से भी लाचार बिचारा बचने के उपाय सोच रहा था “

तभी अचानक घने काले बदलो में बिजली तड़तड़ाहट सुरु हो गई और पल भर में बारिस के साथ ओले( पत्थर गिरने लगे ) पत्थर का आकर बहुत बड़ा था जिसके चोट से बच्चे की मौत भी हो सकती थी |

पैरो से लाचार था बच्चे को कही उठा के ले भी नहीं जा सकता था |तोते ने बिना समय जाया जिए झट से अपने पर ( पंख ) फैला कर घोसले के ऊपर बच्चे को ढक कर बैठ गया |

Parrot Ki Kahani

फिर क्या ? कुछ ही पल में पत्थरो के चोट से पोते के पर (पंख ) छत-विछत (टूट-फुट) जाते है और बिचारे तोते की मौत हो जाती है ! लेकिन अपने बच्चे को एक खरोंच तक नहीं लगने देता |

पिता को कोसने वाला बेटा आज पिता की मौत का पल-पल गवाह था ! आज मासूम बेटे को पिता के प्रेम का अहसास हो चला था लेकिन उसके पिता तोता दुनिया छोड़ चुके थे |


तूफान चला गया देर शाम तक मैना अपने घर लौट के आती है और नजारा देख वह गम में डूब जाती है आज एक पिता ने अपना फर्ज अदा लिया नम आँखों से तोते को विदा करती है और अपने को कोसती रहती है |

निष्कर्ष- प्रिय पाठक ये तोता मैना कहानी (Tota Maina Ki Kahani)लिखते हुए मेरी आँखे भर आयी थी आप को कैसी लगी कमेंट कर के बताना न भूले |

The End

32 thoughts on “Tota Maina Ki kahani- तोता ने फर्ज निभाते हुए दे दिया अपनी जान..”

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