sahas ki story in hindi, जिद्दी राहे

sahas ki story in hindi, जिद्दी राहे एक नाविक के सफर की कठिनाइयों को बयां करती हमें इंसानियत का पाठ पढ़ाती हुई। अदम्य साहस की इस हिंदी कहानी में आप को ज्ञान की अनुभूति होगी.

यह कहानी है उस नाव की जिसमे तिरासी नाविक सफर कर रहे थे। ओर दिशा एटलांटिक सागर की
ओर थीओर वह समय दूसरे विशव युद्भ के शुरुआत दिन थे।हाँ यह अलग बात है कि वे सभी किसी युद्भ भी के पक्षधर नही थे।

वे सब की इच्छा तो नेई दुनिया की खोज करने की थी लेकिन उन का जहाज बर्फ के तुफान मे फंस चुका था दूर दूर तक कोई मसीहा नही था उन को मालूम चल चुका था कि अपनी मदद खुद ही करनी थी ऐसे मे जब उनका जहाज टूट चुका था पर एक छोटे सी चट्टान पर शरण मिली शायद बहुत दिन किसी मदद केलिए.

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बैठे रहे जब यह मान चुके कि कोई मदद नही मिलने
वाली तो वे सब खुद उठ खडे हुये अपने लिए….
ओर अपने लिए छोटी नाव तैयार कर ली जिसमें मुश्किल से तीन आदमी बैठ सकते थे।sahas ki story in hindi से हमें कठिनाइयों से लड़ने की शिक्षा मिलती है।

ओर उन मे से तीन लोग अपनी मददगार को ढूँढने निकल पडे, जिसमे से एक वयक्ति नाव को अपनी मंजिल की ओर खेने लगा ओर दूसरा अपने हाथ मे सेक्सटेंट जो कोण नापने वाला यंत्र था को पकडें दिशा का मूल्यांकन करता ओर तीसरा नाँव मे भरे पानी को बाहर फेकता ओर लहरो से नाव
का बैलेंस बनाता ओर अपनी दिशा की तलाश मे चल निकले।


उन्हें इस बात का बोध था कि वे शेष बची जिंदगी की इकलौती
उम्मीद हे जिसे सुरक्षित मंजिल देनी है।
परंतु यह इतना आसान भी नही था जरा सोचे वहाँ कोई काम
आसान नही है ।

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लहरो के विपरीत चप्पू चलाना ओर बार बार
नाँव मे पानी भर जाना ओर सब से कठिन तो दिशा केलिए
था क्यो कि लहरे आती ओर तुम्हारी नाँव को ऊपर उछाल
देती अब ऐसे मे अगर अपना यंत्र ऐक डिग्री का अंतर कर दे तो आप अपनी मंजिल से करीबन साढ किलोमीटर दूर पहुंच जाते फिर आप सोचते की आप पर शेष जिंदगियां की जिम्मेदारी है, अत:दिशा को पकडे रहना ही आवश्यक है…

अब जरा यह जान लो कि हम मे हर कोई ऐसी ही यात्रा
कर रहा हे ….हंसे नही अपनी आँख बंद करें देखे आप को
कंफयूज करने केलिए बहुत सी मंजिल दिखेगी चुनाव कोन
सा करोगे यह महत्त्वपूर्ण हे क्यो कि तुम्हारे ऊपर परिवार का बोध हे,ओर वे लहरे जो तुम्हारा मन पैदा करता है जिस के
तेज प्रहार से तुम महीनो अपने काम को भूल जाते हो,वह
समुद्र जिस पर तुम हो वह तुम्हारा विशव है जिस मे तुम
को सब कुछ खोजना है…

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याद रहे यहाँ जानबूझकर कर की गयी गलती की कोई
गुंजाइश नही है जिंदगी आप को दोबारा मौका नही देगी
एक डिग्री कोण या एक गलती आपकी मंजिल केलिए घातक
है…
तो यहाँ समभावनाये भी ऐसी,जिस का खुद भी अनुमान करना बेइमानी सा…..
बस दिशा का बोध है भी तो ऐसा जो केवल मन पर आधारित ।


हर मोड पर फिर हजारों नेई बनती दिशाओं से व्यग्र होता
यह मन, ओर ऊपर से इन लहरो की उठापटक आप की परीक्षा के क्षण हो जैसे, जहाँ अपनी दिशा से एक डिग्री कोण भटकने से अपनी मंजिल वाली दिशा को हजारो किलोमीटर
दूर कर देती है ओर फिर भी मंजिल वहीं चाहिए तो वह तुम्हारे होसलो की परीक्षा है |


हाँ हारने वाले सदैव किसी अंजान मंजिल के राही होते है
जिन को यह कहते सुनो गे कि चाहा था कुछ पर आ गये
यहाँ जिस की कल्पना भी नही थी( भाग्य की सीमा यही
से शुरुआत होती है)

लेकिन जिददी राही के रास्ते कभी तो अपनी वाली
मंजिल को छुये गे ही??

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