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New Moral Stories In Hindi , achi kahaniyan especially for children . This moral story help to enhance thinking power of child and also helpful for teacher and guardian too.

new moral stories in hindi, achi kahaniyan प्यारे बच्चो यहाँ आप पड़ेंगे 7 नई हिंदी कहानियाँ जहाँ आप को General Knowledge से जुड़े सवाल भी मिलेंगे। सभी हिंदी कहानियां मनोरंजन से भरपूर है।

1 . Short Moral Storys In Hindiघमंडी मछली

Short Moral Story In Hindi For Kids
मछली को तालाब में ले जाता मेढक

एक तालाब में मछलियों के साथ एक मेंढक अपने परिवार के साथ रहता था। एक दिन किसी मामूली विवाद को लेकर मछलियों की रानी ” मेघना” ने मेंढक को तालाब से बाहर निकाल दिया।

अब मेंढक तालाब से चंद मीटर दूरी जमीन पर रहने लगा ! एक दिन भयंकर तूफान आता है ,रानी मछली अन्य मछलियों के साथ पानी में ऊपर-निचे जम्प करके तूफान का आनंद ले रही थी।तभी हवा के तेज झोकों से रानी मछली उड़कर तालाब से दूर मेंढक के घर के पास जा गिरी। वह तड़पने लगती है आज रानी मेघना को अपनी आँखों के सामने मौत नजर आ रही थी।

क्योंकि पानी के बाहर ज्यादा समय जिंदा नहीं रह सकती थी उसे अब सांस लेने में तकलीफ हो रही थी ।

सवाल क्या मछली मर जाएगी ?

सभी मछलियां रानी को तड़पते देख रही थी लेकिन कुछ कर नहीं सकती थी। तब मेंढक ने अपना फर्ज निभाया रानी मेघना मछली को अपनी पीठ पर लादकर पानी तक तालाब में ले गया ” इस प्रकार से रानी मछली की जान तक जाती है। ”  अब  सारी मछलियों ने मिलकर उस मेंढक से माफी मांगी “मेंढक और मछलियां एक साथ रहते हैं”

 इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी का अपमान नहीं करना चाहिए हमारे जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।

MORAL OF STORY

Story In Hindi For Kids

मेढक और मछली के कुछ रोचक तथ्य :

  • मेढक मुख से पानी नहीं पीता ! पानी Skin से absorb करता है !
  • मेढक अपनी शरीर आकर के २० गुना तक जम्प कर सकता है !
  • मेढक की कुछ कोशिका 1.5 Km दूर तक की आवाजे सुन सकती है!
  • मछली के बच्चे का जन्म शरीर के अंदर नहीं बल्की बाहर पानी में होता है।
  • मछली पानी के अंदर ही gills के द्वारा श्वसन करती है !

2. story for kids in hindi – चालक खरगोश और मुर्ख गधा –

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मुर्ख गधा

एक बार एक खरगोश और गधा हरी घास की तलाश  में बीच घने जंगल में चले जाते हैं क्योंकि जंगल के आसपास की सभी घासे खत्म हो चुकी थी । तभी उनकी नजर एक छोटी सी गुफा में पढ़ती है और गुफा की चारों तरफ हरी भरी घास थी  जिसे देख उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा ।

 घास को देखकर गधा तुरंत खास की तरफ दौड़ पड़ा वहीं खरगोश वही खड़े-खड़े सोचने लगा ! 

Short Moral Story In Hindi For Kids
Moral Story In Hindi

खरगोश रुका क्यों आगे पढ़े…..

कि इस बड़े विशाल जंगल में लाखों जानवर है लेकिन अभी तक इस घास को किसी ने क्यों नहीं चरा इसलिए खरगोश वहीं रुका रहा और गधे को देखता रहा , गधा बिना सोचे समझे गुफा के पास पहुंचकर जल्दी-जल्दी घास कुछ चरने लगा तभी अचानक उसके ऊपर एक शेर ने हमला कर दिया  यह देखकर खरगोश वहां से भाग खड़ा हुआ।

गधा अब शेर का शिकार बन चूका था जिसे शेर ने मार दिया।

अपनी बुद्धिमत्ता और समझदारी के कारण ही खरगोश आज जिंदा है अन्यथा वह भी गधे की तरह मारा गया होता।

तो बच्चों हमें इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि हमें बिना सोचे समझे कोई कार्य नहीं करना चाहिए !

प्रश्न – गधा क्यों मारा गया  ?

कुछ रोचक तथ्य- शेर और खरगोश से जुड़े

  • खरगोश अपने कान को 180 डिग्री से० तक घुमा सकता है
  • खरगोश की स्पीड  60 km/h तक हो सकती है !
  • शेर बिल्ली की प्रजाति के होते है और मादा शेर मुख्य शिकारी होती हैं।
  • एक शेर की दहाड़ को आठ किलोमीटर दूर तक सुना जा सकता है।

Moral Story In Hindi For Kids

3. मुर्गा चला परदेश –

Short Moral Story In Hindi For Kids
मुर्गा चला परदेश

Latest Moral Story In Hindi –

एक गांव में एक मुर्गा रहता था  लेकिन वह अपनी जिंदगी से खुश नहीं था क्योंकि उसे प्रतिदिन दाना चुगने के लिए दिनभर खेतों से होकर इधर-उधर भटकना पड़ता था. इसलिए मुर्गे ने परदेस (शहर ) जाने का निर्णय किया क्योंकि उसने सुन रखा था कि जो लोग परदेश में नौकरी करते हैं और अच्छा-अच्छा भोजन मिलता है और रंगीन दुनिया है !

मुर्गा एक दिन गांव से शहर की तरफ अकेले ही निकल पड़ता है अपने ख्वाब लेकर!

मुर्गा शहर में पहुँचता है ! सब कुछ नया था और वहां की जिंदगी भागदौड़ भरी थी मुर्गे के मन में शहर को और करीब से जानने का कौतूहल होने लगा  मुर्गा शहर में इधर-उधर भटकने के बाद जब उसे कुछ नहीं समझ में आया तो वहीं शहर के बीचो बीच चौराहे पर बैठ गया।

 तभी उसकी नजर पास की एक मकान पर पड़ी जिसमें चारों तरफ से जाली लगी हुई थी और अंदर कुछ मुर्गे दिखाई दिए !उसने देखा कि उस जाली के अंदर एक व्यक्ति प्रवेश करता है और काफी मात्रा में खाना और पानी मुर्गों को देता है फिर दरवाजा बंद कर के चला जाता है.

मुर्गा यह सब देख के सोचने लगा कि लगता है ? कि यही वह फैक्ट्री है जहां मुर्गे आकर काम करते हैं और फ्री में खाना खाते हैं।अब मुर्गा भी सोचने लगा कि मैं भी इस फैक्ट्री में काम करने के लिए जाऊंगा ,

आखिर मुर्गा कैसे मरा आगे पढ़े….

अगले दिन मुर्गा देखता रहा और जैसे ही मालिक खाना और पानी लेकर मुर्गों के मकान का दरवाजा खोलता है  वह ऐसे ही ग्रामीण मुर्गा भी तुरंत जल्दी से दरवाजे के अंदर घुस जाता है और उन मुर्गों के साथ मिल जाता है।

आज मुर्गा कैद हो गया उसकी अकल ठिकाने लग गई।

तब मुर्गे को याद आती है कि मैं तो गांव में ही अच्छा भला था यहां आकर मैंने अपने जीवन का बहुत बुरा फैसला ले लिया और कम से कम मेहनत करके दो वक्त की रोटी मिल जाती थी और एक सुकून भरा जीवन जीता था।

 इस प्रकार से मुर्गे को उसके गलत निर्णय की सजा मिल जाती है।कुछ दिनों बाद उस मुर्गे को कसाई के यहां भेज दिया जाता है और मुर्गा और इस दुनिया में नहीं है।

इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि मेरे पास जितना है उसी में गुजर-बसर करना चाहिए इधर-उधर भटकना नहीं चाहिए।

मुर्गे के बारे में कुछ रोचक तथ्य :

  • मुर्गा एक बार में केवल 60 मीटर या 200 फ़ीट तक ही उड़ सकता है !
  • मुर्गी अपने अंडे को दिन भर में 50 बार टर्न (घुमाती ) करती है !moral stories for kids in hindi

4. hindi stories with moralचालाक कौवे ने बिल्ली को बनाया मुर्ख

Short Moral Story In Hindi For Kids
शिकारी कौवा

एक बार एक बिल्ली ने एक चूहे का पीछा किया लेकिन चूहा पेड़ के नीचे जाकर एक बिल में छिप जाता है।बिल्ली ने चूहे को बिल से निकालने की काफी कोशिश करी लेकिन वह असफल होकर उसी बिल के पास उदास होकर बैठ जाती है।

 बिल्ली भूख से तड़प रही थी और चूहा उसके लिए अच्छा भोजन हो सकता था।पेड़ की शाखाओं पर बैठा एक कौवा यह सब देख रहा था ! कौवा भी चूहे को  अपना निवाला बनाना चाहता था।

 फिर चलाक कौवे ने बिल्ली से कहा –  बिल्ली बहन यहां क्या कर रही हो 

बिल्ली बोली कुछ नहीं कौवा जी बस “शिकार की तलाश’ में मैं यहां बैठी हूं और मेरा शिकार इस बिल में घुस गया है। फिर चालाक कौवे ने कहा अच्छा बहन यह बात है !

चूहा बिल्ली और कौवे की सारी बात सुन रहा था। 

क्या चूहा बिल से बहार निकलता है ?

फिर कौवे ने बिल्ली से कहा कि तुम चूहे का आज कुछ नहीं बिगाड़ सकती हो  !

बिल्ली– आश्चर्यजनक तरीके से पूछा ऐसा क्यों  ?

कौवा – क्योंकि आज “गणेश जन्माष्टमी है ” और चूहा गणेश जी की सवारी है और आज के दिन चूहे के पास अपार शक्तियां होती हैं जिसका सामना हम और आप दोनों लोग मिलकर भी नहीं कर सकते हैं।

यहाँ तक की आज जंगल का राजा शेर भी चूहे का सामना नहीं कर सकता !फिर क्या ? बिल्ली डर के दूर भाग खड़ी हुई ! जिसे सुनकर चूहे का सीना चौड़ा हो गया और उसने बिल्ली को सबक सिखाने की सोची।

चूहा बिल से बाहर निकलकर बिल्ली की तरफ झपट्टा मारता है और तुरंत ही कौवा उस चूहे को अपने चंगुल में फंसा कर लेकर उड़ जाता है। इस प्रकार से चालाक कौवे को उसका भोजन मिल जाता है।

तो बच्चों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कभी किसी की चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आना चाहिए।

हमें उत्साह में या किसी के बहकावे में आकर कोई बड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए नहीं तो हमारा हाल भी उस चूहे जैसा ही होगा  ।

Short Moral of Story

कौवा और चूहे से जुड़े -कुछ रोचक तथ्य ?

  • कौवा कभी-कभी कोयल के घोसले में अपने अंडे रख देता है !
  • चूहा एक दिन में 15 से 20 बार खाना खाता है ! Moral Story In Hindi

मोटू और पतलू की जोड़ी का: स्कूल में चुन्नू-मुन्नू से पंगा. Click hear

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5. गधा बना जंगल का राजा (Short Moral Story In Hindi For Kids)

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बूढ़ा शेर

एक समय की बात है जंगल में एक बूढ़ा शेर रहता था अब वह शिकार नहीं कर सकता था ! इसलिए उसने एक दिन जंगल के सभी जानवरों को बुलाया और कहा कि जंगल के लिए नया राजा चुनना है, अब मुझसे ये जिम्मेदारी नहीं संभाली जा रही।


जंगली जानवरों द्वारा काफी विचार विमर्श करने के बाद यह निर्णय लिया जाता है कि जंगल में एक रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा और उसे जीतने वाला ही जंगल का राजा बनेगा।
प्रतियोगिता जीतने के लिए जंगल से दूर पहाड़ियों के बीच बने सिंहासन पर पहुंचकर पहले बैठना था।
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागी सामने आते है “चूहा, बिल्ली, कुत्ता, लोमड़ी और, गधा जो अपना नाम दर्ज कराते हैं। सभी के मन में राजा बनने की बड़ी लालसा थी, और एक दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए बेताब थे !


अंत में रेस की शुरुआत राजा शेर अपनी दहाड़ से करता है ” जिसके सभी जानवर गवाह थे “एक तरफ कुत्ता और लोमड़ी अपनी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे तो दुसरी तरफ चूहा भी सोच रहा था कि अगर कछुआ रेस जीत सकता है खरगोश को हराकर तो मैं क्यों नहीं ।


ज्यादातर जानवरों ने कुत्ते और लोमड़ी पर सट्टा लगाया था रेस शुरू होती है शुरुआत में कुत्ते और लोमड़ी के बीच जंग देखने को मिलती है लेकिन बिल्ली भी इन से कम नहीं थी।रेस लंबी थी लेकिन जंगली जानवरों को अपने नए राजा का इंतजार था ।


राजा बनने की चाहत लिए कुत्ता लोमड़ी और बिल्ली जैसी सिंहासन के करीब पहुंचती हैं तो देखती हैं “गधा सिंहासन पर बैठ चुका है “और चिपो-चिपों चिल्लाकर जीत पर मुस्करा रहा ” सभी जानवर हताश निराश मानो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई “सभी जंगली जानवरों के लिए एक दुखद क्षण था कि अब उन्हें एक गधे के अण्डर रहकर काम करना है !


सवाल- आखिर गधा सबसे पहले सिंहासन पर कैसे पहुंचा :

जवाब- क्योंकि कुत्ता और लोमड़ी आपस में उलझ जाते हैं एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए और एक दूसरे को घायल भी कर देते हैं,


बिल्ली और चूहा भी आपस में एक दूसरे से उलझ जाते हैं जिसमें चूहा घायल हो जाता है और बिल्ली अपना बेशकीमती समय गंवा देती है !

इतना ही नहीं जंगल के बाहरी इलाके के कुत्तों ने भी उस कुत्ते और लोमड़ी को बुरी तरह से काटा था जिससे वह घायल थे और उनको पहुंचने में उनको बहुत देर हो गई , ” यही हाल बिल्ली और चूहे का था “वहीं गधा अपनी मस्ती में चलता रहा उसे कोई पूछने वाला नहीं था और वह अपनी मेहनत से सिंहासन पर बैठ जाता है।


“यह मधुर कहानी हमारे आज के समाज के फिट बैठती है हम अपनों से ही उलझे रहते है”

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें आपस में एक दूसरे से नहीं उलझना चाहिए बल्की एक-दूजे का सहारा बनाना चाहिए !

 MORAL OF STORY

गधा से जुड़े रोचक तथ्य ?

6. घायल  शेर की कहानी .(Interesting Moral Story In Hindi For Kids)

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घायल  शेर

जंगल का राजा शेर शिकार करते वक्त घायल हो जाता है, फिर वह गुफा में जाकर आराम करने लगता है। शेर के घायल होने की सूचना जैसे ही अन्य जंगली जानवरों को लगती है सारे जंगली जानवर खुशी से झूम उठते हैं.

सभी जंगली जानवर शेर के मर जाने की दुआ करने लगते हैं  ” शेर कई दिनो तक गुफा से बाहर नहीं निकलता “एक दिन जंगली हाथियों ने बड़े-बड़े पत्थर उठाकर शेर की गुफा के मुख्य द्वार पर लाकर ढक दिया जिससे शेर कभी बाहर न निकल सके और उसकी मृत्यु हो जाए।

सभी जंगली जानवर मौज मस्ती से रहने लगे, शेर भूखा और असहाय हो चुका था अब उसके पास इतनी शक्ति नहीं बची थी कि वह उन पत्थरो को हटाकर गुफा से बाहर निकल सके। शेर दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा था और भूख से तड़प रहा था  ।

क्या शेर की मौत हो जाती है आगे पढ़े…..

तभी एक दिन बंदरों का एक ग्रुप शेर की गुफा के पास आता है जो कि कहीं दूर से आए हुए थे जो जंगल में नए थे  , शेर की गुफा का ऊपरी हिस्सा थोड़ा सा खुला हुआ था लेकिन वहां से निकलना संभव नहीं था ! तभी एक घटना घटी  बंदर का एक छोटा बच्चा खेलते खेलते उस की गुफा के अंदर जा गिरा  ।

मानो आज शेर को निवाला मिल चुका था और उस बच्चे की मां बंदरिया और पिता बंदर शेर की तरफ मायूस निगाहों से देख रहे थे कि कास से मेरे बच्चों को जिंदा छोड़ दें तभी शेर की मन में दया भाव जाग उठी और उसने उस बच्चे को जिंदा छोड़ दिया ।

अब शेर और बंदर में गहरी दोस्ती हो चुकी थी  शेर ने उस बंदर को पूरी आपबीती सुनाई और कहा कि उसे जंगली जानवरों ने कैसे इस गुफा के अंदर कैद कर दिया है जिसकी बात सुनकर बंदर ने उस शेर की मदद करने के लिए सोचा  ।

फिर सबसे पहले बंदरों ने शेर के लिए भोजन की खोज करना शुरू कर दिया और प्रतिदिन वह शेर के लिए जंगल से मांस की व्यवस्था करने लगे शेर अब ठीक हो गया था। कुछ दिन बीतने के बाद शेर हिष्ठ-पुष्ट और नौजवान नजर आने लगा “,उसकी सारी शक्तियां उसे वापस मिल गई।

 लेकिन किसी भी अन्य जंगली जानवर को इसकी खबर नहीं थी वह यही समझते थे कि शेर मर चुका है और अब हम आराम से इस जंगल में रहे थे, फिर एक दिन शेर और बंदर सभी ने एक साथ मिलकर उन पत्थरों को गुफा के मुख्य द्वार से दूर धकेल दिया और शेर बाहर आ जाता है  ।

शेर ने उन हाथियों को मार गिराया जिसने उन्हें कैद किया था !इस प्रकार से शेर की जान बचाकर बंदर ने अपना फर्ज निभाया।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दया भाव की भावना से किसी का भी दिल जीता जा सकता है चाहे व्यक्ति कितना ही कठोर ही क्यों न हो।

moral of story

बन्दर के बारे में कुछ रोचक तथ्य :

  • बन्दर की कुछ प्रजाति 15 फिट तक हवा में छलांग  लगा सकती है !
  • मनुष्य  का 98% DNA  बंदरो से मिलता है इसीलिए इन्हे हमारा पूर्वज कहा जाता है।

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