Moral Stories in Hindi for Class 6, 7, 8

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Moral Stories in Hindi for Class 6

Moral Stories in Hindi for Class 6
Moral Hindi Story

1. फूल और पत्थर की कहानी-

वैसे तो आप ने मासूमियत भरे फूल और कठोर पत्थर की बहुत सी हिंदी कहानियां सुनी होगी लेकिन आज मैं एक शैतानी फूल और मासूम पत्थर की कहानी आप के मन को गुदगुदा के रख देगी

एक फूलों बगीचा था । गर्मियो के मौसम में सभी फूल मुरझा गए थे केवल एक फूल अकेला सुंदर मनमोहक सा खिला हुआ था !

जो इस बगीचे की शोभा बढ़ा रहा था । बगीचे की सुंदरता देश- विदेश के सैलानियों को अपनी तरफ आकर्षित करती रहती थी ।

उसी फूल के पास में एक काला पत्थर पड़ा हुआ था ,” जिसे लोग पैरो से ठोकर मारते हुए चलते थे जिसे कोई पसंद नही करता था ।”

फूल पत्थर की किस्मत पर उसको चिढ़ाता था कि देखो अपनी भद्दी सकल तुम्हे लोग ठोकर मारते है ।
और मुझे देखो लोगो का प्यार मिलता है लोग मुझे देख कर खुश होते है ।

आगे कहता है तुम एक कलंक हो इस बगीचे के लिए ।
इसी तरह रोज सैलानी बगीचे में आते रहते फूल को देखकर मुस्कराते थे फूल पत्थर को चिढ़ाता रहता ।

क्या पत्थर बदला लेगा आगे पढ़े !

Short Moral Stories in Hindi for Class 6

कुछ दिनों बाद एक शिल्पकार उसी बगीचे में आया उसने भी फूल को देखा, मुस्कराते हुए आगे बढ़ा और पत्थर को अपने साथ उठा ले गया ।
उस शिल्पकार ने उस काले पत्थर को तरास कर सावली सूरत भगवान श्री कृष्ण का रूप दे दिया ।

फिर वही पास में एक मंदिर में उस मूर्ती को स्थापित कर दिया जहाँ लोग दर्शन करने आया करते थे ।


 सुबह एक सैलानी उस फूल के बगीचे से गुजरा और सुन्दर फूल को तोड़ कर उसी मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के चरणों मे अर्पित कर दिया ।
फूल को पत्थर ने पहचान लिया और फूल शर्म से मारा जा रहा पत्थर से आंखे तक नही मिला पा रहा ।

लेकिन भगवान रूपी पत्थर ने उसको माफ कर दिया ।


निष्कर्ष- इस हिंदी कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि किसी की कुरूपता का मजाक नही बनाना चाहिए ।


2. मेहनत का फल एक सुन्दर कहानी –

यह कहानी कॉलेज में पढ़ने वाले एक छात्र की है जिसका काल्पनिक नाम आशीष है ।

तकरीबन दो दशक पहले की बात है। आशीष बिहार से चलकर जौनपुर उत्तर प्रदेश टीटी कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए प्रवेश लेता है।

उस समय आशीष की उम्र करीब 20 वर्ष थी। जिसे कॉलेज के छात्र बिहारी-बिहारी कहकर भी पुकारते थे। वह मध्यवर्गीय परिवार से था। किराए पर रूम लेकर यही कॉलेज के पास में ही रहता था।

जो बड़ी मुश्किल से अपना गुजर-बसर कर रहा था ,”उसके पास पैसे हुआ थे महीने के आखिरी दिनों में ।

वैसे तो आशीष पढ़ाई में बहुत अच्छा था लेकिन कभी भी उसकी फाइल और कापियां पूरी नहीं हुआ करती थी।
जिससे वहां के अध्यापक आए दिन उसे कड़ी से कड़ी सजा देते रहते थे।

एक दिन एक घटना घटती है, तकरीबन रात को 11:00 बज रहे थे और घनघोर बारिश हो रही थी।

कॉलेज में पढ़ाने वाले गुरुजी किसी जरूरी काम से बाजार गए हुए थे शहर के बीचोबीच बने शाही पुल के पास एक छोटी सी दुकान में खड़े हुए थे ,”और किसी रिश्ते वाले का इंतजार कर रहे थे।”

उस समय मोबाइल फोन भी नहीं के बराबर हुआ करते थे। गुरु जी को कुछ सूझ नहीं रहा था ! कि अब वह कैसे घर जाएं, और ना ही कोई रिक्शावाला इतनी रात को घर जाने के लिए तैयार हो रहा था।

गुरु जी को घर कौन पहुँचता है-

अब 11:30 बज चुके थे। तभी गुरुजी के सामने एक रिक्शावाला आकर रुकता है और गुरुजी से कहता है कि चलिए सर हम आप को घर छोड़ दें। उसके बाद गुरुजी उस रिक्शे पर बैठकर अपने घर के लिए निकल पड़ते हैं।
घर पहुंचने पर गुरु जी ने ! पैसा निकाला और पैसा रिक्शेवाले के हथेली पर रखते हुए उसकी हथेली में एक लंबा चोट का निशान देखा।

गुरु जी ने रिक्शे वाले से चेहरे पर ढके मास्क को हटाने के लिए बोला, लेकिन रिक्शेवाले ने मना कर दिया और वह वहां से चला गया।

उस दिन गुरुजी देर रात तक जागते रहें और उस रिक्शेवाले के बारे में सोचते रहे कि कहीं हमसे उसे देखा है ,” उसके हथेली के जख्मों को भी याद करने की कोशिश कर रहे हैं। “

गुरूजी ने शयद वह जख्म कई बार देखे थे जो उन्हें याद नहीं आ रहा था।

कुछ दिनों बाद आशीष की फाइल न पूरा होने के कारण गुरुजी उसे सजा देने के लिए हथेली आगे बढ़ाने लिए कहते हैं।

तभी अचानक गुरु जी के हाथों से छड़ी छूट जाती ह “, और उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। “

क्योंकि आशीष ही वह रिक्शावाला था जिसने उस रात गुरु जी को घर पर छोड़ा था !जिसकी हथेली में वही जख्म के निशान भी थे।

गुरुजी ने यह बात क्लास के किसी अन्य स्टूडेंट को नहीं बताई अपने तक ही रखी और जहां तक हो सका छात्र की उन्होंने मदद की वह छात्र आज अपने गांव लौट चूका है । जो शायद अब अध्यापन का कार्य करता है।

आशीष होते हुए भी पढ़ने के लिए दिन रात मेहनत करता था। रिक्शा का चलाता था, मजदूरी करता था।
लेकिन कल ही उसने अपना ईमान नहीं बेचा था।

नैतिक शिक्षा – Moral Stories in Hindi for Class 6, 7, 8

आप को हमेशा अपने कार्य प्रति निष्ठावान होना चाहिए लक्ष्य स्वतः हासिल हो जायेगा।

3 to 7 Coming Soon Hindi Moral Stories

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