Khatarnak Bhoot Ki Kahan

बीर बाबा ने बसंत दादा की जान बचाई

यह एक khatarnak bhoot ki kahani है जो पूरी तरह सत्य है.” जिसे बसंत दादा ने सुनाया ” यह घटना लगभग ४५ वर्ष पहले घटित हुई थी।

khatarnak bhoot ki kahani

वीर बाबा और बुरी शैतान की कहानी ।

एक बार की बात है। एक गांव में दो घनिष्ठ मित्र रहते थे जो अपना जीवन-यापन मजदूरी करके करते थे।
एक का नाम बसंत। तो दूसरे का नाम गामा था।

दोनों मित्र प्रतिदिन गांव से शहर को मजदूरी करने के लिए निकलते थे और प्रतिदिन शाम को घर की तरफ लौटेते थे।
एक दिन गामा की तबीयत खराब हो जाती है तो बसंत को अकेली ही मजदूरी करने के लिए जाना पड़ता है।

शाम को काम से लौटते समय बसंत को देर हो जाती है। किन्ही कारणों से तकरीबन 12:30 से 1:00 बज रहे होते हैं। लेकिन बसंत निडर होकर रोज की तरह अपनी घर की तरफ चला जा रहा था।

कुछ देर बाद वह सुनसान इलाके में पहुंचता है जहां दूर-दूर तक किसी इंसानी बस्ती का नामों निशान नहीं था।
सब खाली और वीरान था।

एक भयानक दृष्य-khatarnak bhoot ki kahani

तेज हवाएं चल रही थी और पीतल के पत्तों की भयानक आवाज उसके कानों तक आ रही थी।

सरसराहट” भरी आवाज बसंत के कानों में पड़ते ही पसंद की रूह कांप उठती है।”

बसंत थोड़ा और आगे बढ़ने की कोशिश करता है तो तभी वहां एक वीरान पड़े खंडहर से उसे छन-छन-छन पायलों की आवाजें आती सुनाई दी ।

अब बसंत के रोंगटे खड़े हो चुके थे दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है । उसके पैर लड़खड़ा से रहे थे जैसे आगे चलने में कठिनाई महसूस कर रहा था।

अब बसंत भयभीत और लड़खड़ाते कदमों से आगे बढ़ने की धीरे-धीरे कोशिश कर रहा था। अभी कुछ दूर ही चला था कि उसे अचानक महसूस हुआ जैसे कि उसके पीछे कोई व्यक्ति है।

वह पीछे मुड़ के देखता है पर कोई नहीं दिखाई पड़ता। बसंत पसीने से पानी-पानी हो चूका था।

भयानक और रहस्य्मय परिस्थितियों में उसने अब जिंदा बचने की उम्मीद छोड़ दिया । थोड़ा आगे चलने के बाद एक पुलिया पर पहुंचता है ! तभी उसके साथ एक भयानक घटना घटती है।

क्या बसंत अभी जिन्दा है जानने के लिए आगे पढ़े ?

बसंत के सामने एक विशाल सर्प फन फैलाये आ जाता है। सर्प का मुख बिंदु चमकदार और आकर्षक था मनो कोई देवता हो । वह कोई साधारण सर्प नहीं लगता था उसके पास दिव्य और अलौकिक शक्तियां थी।

सर्प ने बसंत से उसके भयभीत होने का कारण पूछा और पूछा कि तुम कहां जा रहे हो ? बसंत ने पूरी कहानी उस दिव्य सर्प को बताया ।

सर्प आगे-आगे चल रहा था मजदूर पीछे-पीछे गांव के करीब आते ही सर्प अचानक गायब हो जाता है । बसंत सही-सलामत अपने घर पहुंच जाता है।

यह कहानी बसंत ने गांव वालों को सुनाई। तब उसे पता चला कि वह सर्प कोई और नहीं !” वह वीर बाबा थे “जो यहां से आने जाने वाले आगंतुकों की रक्षा करते हैं रात में।
आस पास के गांव वालों का मानना है कि वीर बाबा आज भी। कभी-कभी किसी को दिखाई पड़ जाते हैं। रात के समय जब कोई मुसीबतों में होता है तो “ऐसे हैं वीर बाबा “और ऐसी है उनकी कहानी कैसी लगी?

75 वर्ष के बसंत कहानी बताते हुए भाउक हो चले थे और वह खौफनाक मंजर याद कर के आज भी कभी-कभी डर जाते है ।

कहानी कैसी लगी कमेंट कर अपना प्यार देना न भूले। khatarnak bhoot ki kahani


0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *