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बहुत समय पहले की बात है शंकू नाम का एक किसान उत्तर प्रदेश ,जौनपुर में रहता था ।गोमती नदी के किनारे उसका घर जंगलों से घिरा हुआ था किसान शंकू के दो और भाई थे लेकिन शंकू उम्र में सबसे छोटा था ।

गांव के लोगो का मुख्य व्यसाय कृषि और मछली पालन था लेकिन शंकू के भाइयों ने उसकी जमीन हड़प लिया ।शंकू को उन्होंने बस एक तालाब दिया जो नदी के किनारे था ।

उस तालाब में उसने मछली पालन करना चाहा लेकिन मछलियां मर गई क्योंकि तालाब में सीपी और घोघो से भरा हुआ था ।

story in hindi
सीपी

रात को अंधेरे का फायदा उठा कर उसके बड़े भाई और गाँव वाले अपने तालाबो से सीपी निकाल कर शंकू के तालाब में फेंक देते थे ।

शंकू का तालाब तालाब सीपी और घोंघे से भरा पड़ा था मछ्ली पालन करना उसके बस की बात नही थी । गाँव वाले उसकी इस व्यथा पर हँसते थे और उसका मजाक उड़ाते थे ।

शंकू के हालात बहुत बुरे हो चले थे अब वो भिक्षा मांगने लगा था घर परिवार चलाने के लिए ।एक दिन किसान शंकू भारी उदास मन से तालाब के किनारे बैठ कर अपनी बदकिस्मत को कोस रहा था आंखों से आँसू गिर रहे थे ।

तभी एक व्यापारी धूप से परेशान होकर शंकू के तालाब के पास पेड़ के नीचे बैठ गया और देखा कि एक किसान रो रहा है ।

और तालाब की उदास होकर तरफ देख रहा है तभी व्यापारी ने किसान से उसके दुख का कारण पूछा तब किसान रोने लगा और उस व्यापारी को सारी बात बताई ! और व्यापारी ने तालाब को करीब से देखा तो वो आश्चर्यचकित रह गया उसमे हजारो लाखों की संख्या में सीपी मौजूद थे मछलियों का नामो निशान नहीं था !

तालाब

व्यापारी किसान को धीरज दे कर चला जाता है कि सब ठीक हो जायेगा |


महीनों बीत जाने के बाद वही व्यापारी शंकू से मिलने उसके तालाब पर आता है जिसे देख वह खुश हो जाता है |उस व्यापारी ने किसान को ढेर सारी आकृतियाँ (साँचा ) दिया | और व्यापारी ने शंकू से तालाब में मौजूद सीपी को बहार निकलने को कहा |


फिर सारी सीपियों को कलर लगा कर रंगीन करने को कहा | शंकू को ये सब कार्य अटपटा लग रहा था और मन ही मन व्यापारी को पागल समझने लगा |


फिर व्यापारी ने आकृति (साँचा ) को उन सीपी के मुँख को खोल कर अंदर एक स्थान विशेष में उन साँचो को रखने को कहा और पुनः तालाब में सीपी को छोड़ देने के लिए कहा |

शंकू को अब विश्वास हो चला था कि ये व्यापारी पागल है |


इतना कह कर व्यापारी चला जाता है | और शंकू भी सीपी को वही छोड़कर भीख मांगने चला जाता है |


घर पर खली बैठी किसान की पत्नी के मन में विचार आया की व्यापारी की बातो को मान लेती हूँ कौन सा पैसा लग रहा | और उसने दिन भर मेहनत करके सीपियों को तालाब पुनः वापस छोड़ दिया |


लगभग एक वर्षों बीत जाने बाद किसान और उसकी पत्नी सीपियों को भूल चुकी थी ! किसान अपनी रोजमर्रा के कार्यो में व्यस्त था | तभी अचानक कुछ लोग घोड़ो पर सवार होकर किसान के यहाँ आते है किसान डर जाता है तभी उसकी नजर उस व्यापारी पर पड़ती है |


फिर क्या ? उसने किसान से मछुहारो को बुलाने के लिए बोला | मछुहारे आकर तालाब से सीपियों को निकल कर किसान के घर पंहुचा देते है ! किसान को कुछ समझ नहीं आरहा था बस वह देख रहा था |


फिर सारे व्यापारियो ने मिलकर एक -एक सीपी के मुख को खोल कर भिन्य-भिन्य आकृतियों की चमकती हुई मोती निकल रहे थे |

मोती


व्यपारियो ने इतनी मोती कभी एक साथ नहीं देखा था | और आज गरीब किसान शंकू गांव का सबसे आमिर वयक्ति बन चूका था और दूर- दूर तक उसकी मोती की खेती के चर्चे होते है |

आज शंकू एक आमिर वयक्ति है और अपना जीवन खुशी -ख़ुशी जी रहा |


(प्रकृत की प्रत्येक वस्तु मूलवान (खजाना ) है)


इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी का अपमान नहीं करना चाहिए |


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