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यहां पर हम बात करेंगे Computer क्या है कंप्यूटर की पूरी जानकारी हिंदी में, आप भली-भांति जानते हैं कि कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक यंत्र है, लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हो जाती आगे आर्टिकल को आप अंत तक पढ़े जहाँ आपको  कंप्यूटर के बारे में सारी बेसिक इनफार्मेशन आपको मिल जाएगी और किसी भी चैनल या प्लेटफार्म पर आपको जाने की एकदम जरूरत नहीं पड़ेगी मैं इस चीज की गारंटी लेता हूं।

कंप्यूटर क्या है – What is Computer .

Computer

कंप्यूटर एक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो तीव्र गति से कार्य करता है, बिना किसी गलती के इसकी क्षमता सीमित होती है। यह अंग्रेजी शब्द के Compute से बना है जिसका अर्थ होता है गणना करना हिंदी में इसे  कहते हैं जिसका उपयोग बहुत सारी सूचनाओं को प्रोसेस करने तथा इकट्ठा करने के लिए किया जाता है।

computer kya hai

 चार्ल्स बैबेज को आधुनिक कंप्यूटर का जनक कहा जाता है क्योकि इन्होने एनालिटिकल इंजन का निर्माण किया था.

Charles Babbage

 Inventor and mechanical engineer, mathematician& philosopher

वास्तव में कंप्यूटर एक यंत्र है जो इनपुट किए गए डाटा और उसे सॉफ्टवेयर अथवा प्रोग्राम के अनुसार किसी परिणाम के लिए प्रोसेस करता है, कंप्यूटर कोई सर्वशक्तिमान या सुपरमैन नहीं है। कंप्यूटर एक यंत्र है जिसे कृत्रिम बुद्धि की संज्ञा दी गई है। इसकी स्मरणशक्ती मनुष्य के तुलना में ज्यादा अच्छी मानी जाती है।

Working Process

A Computer is an Electronic Machine have ability to accept data (input), process it, and then produce outputs.

Important facts

आधुनिक युग को कंप्यूटर युग के नाम से जाना जाता है , २ दिसम्बर प्रतिवर्ष विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

कंप्यूटर की कार्य प्रणाली को  5  भागों में बांटा जा सकता है।

  1. Input : यह डाटा और अन्य अनुदेशकों कंप्यूटर के अंदर ले जाने का कार्य करता है।

2. Storage (भंडारण) :  डाटा और अनुदेशकों का संग्रहण करना ताकि उनको आवश्यकता अनुसार समुचित समय पर दोबारा प्रयोग किया जा सके।

3. Processing : दिए गए डाटा पर निर्देश के  अनुसार विभिन्न क्रियाएं कर उन्हें सूचना के रूप में परिवर्तित करना ही प्रोसेसिंग कहलाती है।

4. Output :  आउटपुट सूचना को आवश्यकता अनुसार उपयोग हेतु दिखाना जिसे हम आउटपुट कहते हैं आउटपुट का मतलब रिजल्ट।

5. Control : कंट्रोल विभिन्न प्रक्रियाओं में प्रयुक्त उपकरणों और सूचनाओं के बीच तालमेल स्थापित करना ही कंट्रोल यूनिट या कंट्रोल कहलाता है।

कंप्यूटर का फुल फॉर्म क्या है – Full Form of Computer ?

कंप्यूटर शब्द अंग्रेजी के 8 अक्षरों से मिलकर बना है जो उसे व्यापक रूप प्रदान करते हैं। वास्तव में कंप्यूटर का कोई फुल फॉर्म नहीं होता। और ना ही किसी एग्जाम में कंप्यूटर का फुल फॉर्म पूछा जाता है, लेकिन हमने अपनी आवश्यकता के अनुसार कंप्यूटर की कुछ फुल फॉर्म बनाए हैं जो नीचे दिए गए हैं।

C – Commonly, O – Operating, M – Machine, P – Particularly, U – Used for ,T – Technical, E – Educational, R – Research.

भारत का प्रथम कम्प्यूटरीकृत डाकघर नई दिल्ली में है.

IMportant fact

कंप्यूटर का इतिहास | history and Development of Computer हिंदी में

मनुष्य प्राचीन काल से ही ऐसे साधनों की खोज में लगा हुआ है जो उसकी शारीरिक और मानसिक कार्यों में शीघ्र ताल। तथा सही रूप से पूर्ण करें ताकि मनुष्य अपने समय की बचत कर सके। इसी गुण के कारण आज विज्ञान ने पर्याप्त प्रगति कर ली है तथा ऐसे उपकरण प्रदान की जो मनुष्य के समय की बचत कर कार्य में शीघ्रता प्रदान कर रहे हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण आपका कंप्यूटर है।

आज ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां कंप्यूटर का प्रयोग ने किया जाता हो। पहले हम गणना अपनी अंगुलियों से करते थे लेकिन आज गणना हम कंप्यूटर से करते हैं बस इतना सा ही फर्क है तब और आज में।


कंप्यूटर  का कालक्रम | Chronology of Computer 

कंप्यूटर का कार्यक्रम निम्नलिखित प्रकार से नीचे दिया गया है।

1.  सन  1665 में स्कॉटलैंड के महान गणितज्ञ जान नेपियर ने हाथी के दांत को आयताकार क्षणों पर अंको को खोदकर गणना की एक नई पद्धति का आविष्कार किया, जिसे नेपियर बोंस के नाम से जाना गया। इसमें दी गई संख्याओं से संबंधित छड़ों को पास पास में रखकर गणिती क्रियाएं की जाती थी।

2.  सन 1620 में जर्मन वैज्ञानिक एडमड गुलेर ने  स्लाइड रूल का विकास किया यह यंत्र भी नेपियर बोंस के सिद्धांत पर ही आधारित था, लेकिन बाद में पाकिट केलकुलेटर आज आने के बाद इसका प्रयोग बहुत कम हो गया।

3. सन 1642 में ब्लेज पास्कल ने पहला यांत्रिक कंप्यूटर बनाया। पास्कल के पिता फ्रांस के पेरिस शहर में एक अधिकारी थे। उन पर कार्य का अधिक बोझ रहता था जिसके कारण इनकी बेटी ने यह बोझ कम करने के लिए इस कंप्यूटर पास्कलीन का निर्माण किया। इस कंप्यूटर यंत्र की क्षमता 6 व्यक्तियों के बराबर कार्य करने की थी।

4. सन 1922 में सर चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंस मशीन इंजन का विकास किया। बाद में इसका नाम बदलकर एनालिटिकल इंजन रखा और इस इंजन का प्रयोग विभिन्न प्रकार की घटनाओं में किया जाता था। इसी कंप्यूटर के विकास की पीढ़ी के रूप में जान जाना जाने लगा। इस कारण से चार्ल्स बैबेज को आधुनिक कंप्यूटर का जनक कहा जाता है।

5. सन 1890 में डॉक्टर हरमन होलेरिस नामक वैज्ञानिक ने पंच कार्ड का आविष्कार किया जो विद्युत द्वारा संचालित किया जाता था।

6. सन 1940 में प्रथम कंप्यूटर विकसित किया गया जिसका नाम मार्क -१  था जो बहुत तीव्र गति से गणनायक करने में सक्षम था।

7.  सन 1942 द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जानल मुचली & एकर्ट ने एक कंप्यूटर बनाया, जिसका नाम  ENIAC था। यह दुनिया का प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था, जिसमें वेक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया गया था।

8. सन 1950 में वान न्यूमैन ने  एक कंप्यूटर बनाया जिसमें विभिन्न प्रोग्रामों को संग्रहित कर के हल निकाला जाता था और यह द्विअंकीय कोड (०, १ ) के सिद्धांत पर आधारित है।

9. सन 1953 तथा सन 1954 में क्रमशः आईबीएम 1 , आईबीएम 650 , इंटरनेशनल बिज़नेस मशीन कारपोरेशन द्वारा बनाए गए कंप्यूटर उसके बाद द्वितीय तृतीय चतुर्थ तथा पंचम पीढ़ी के कंप्यूटर लगातार बनाए गए।



Component of computer system | कॉम्पोनेंट आफ कंप्यूटर !

दोस्तों कंप्यूटर ढेर सारी छोटी-छोटी  Component  से मिलकर बना हुआ है। आज हम इन सभी  Parts  के बारे में एक-एक  करके अध्ययन करेंगे।

Motherboard ( मदरबोर्ड )

Motherboard

इसे मेन बोर्ड के नाम से भी जाना जाता है। इसका मुख्य कार्य है कंप्यूटर के सभी पार्ट्स को आपस में जोड़ना। जिस प्रकार से घर में एक मां अपने सभी बच्चों को आवश्यकता के अनुसार उनकी जरूरतों को पूरा करती है। उसी प्रकार से मदर बोर्ड आवश्यकता के अनुसार कंप्यूटर के सभी पाठ को आपस में जुड़े हुए होती है और जरूरी इंफॉर्मेशन को एक जगह से दूसरी जगह में ले जाने में सहायता प्रदान करती है।

जैसे – सीपीयू , मेमोरी,  हार्ड ड्राइव , ऑप्टिकल डिस्क।

CPU

कंप्यूटर में एक सीपीयू होता है जिसे कंप्यूटर का ब्रेन कहा जाता है।  सीपीयू मदरबोर्ड के मध्य भाग पर लगा हुआ होता है और वही से पूरे कंप्यूटर के एक्टिविटी को कंट्रोल करता है। हमें हमेशा अच्छी क्वालिटी के सीपीयू का चुनाव करना चाहिए।

RAM COMPUTER KYA HAI

RAM को हम Random Access Memory के नाम से भी जानते हैं। इस शार्ट टर्म मेमोरी भी कहा जाता है। RAM कंप्यूटर की वर्किंग मेमोरी होती है। एक बार कंप्यूटर बंद हो जाने पर दुबारा उस में लिखे गए डाटा स्वत ही मिट जाते हैं।  आजकल 4 जीबी की रैम अच्छी राय मानी जाती है। आप उससे ज्यादा 8GB या फिर 16GB भी प्रयोग में ले सकते हैं।

Hard Disk | हार्ड डिस्क

HDD

Hard Disk को द्वितीयक मेमोरी के नाम से भी जाना जाता है जहां फाइल और सॉफ्टवेयर को सुरक्षित किया जाता है। इसमें हम अपने डाटा को लंबे समय तक के लिए स्टोर करके रख सकते हैं। आजकल SSD Drive ( ड्राइव ) का प्रचलन ज्यादा है। अगर आप नई हार्ड ड्राइव लेना चाहते हैं अपने लैपटॉप के लिए तो आप SSD हार्ड ड्राइव का चुनाव करें।

Expansion Card

CARD

Expansion Card वास्तव में पुराने कंप्यूटरों को अपडेट करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। एक्सपेंशन स्लॉट्स मदरबोर्ड पर खाली स्थान होते हैं जहां पर बाद में हम अपनी टेक्नालॉजी को अपडेट करने के लिए नए एक्सटेंशन कार्ड को ऐड कर सकते हैं। जैसे – साउंड कार्ड, नेटवर्क, कार्ड, ब्लूटूथ, कार्ड, वीडियो, कार्ड इत्यादि।

नोट- अगर आप कंप्यूटर ले रहे हैं तो आप जानकारी अवश्य ले क्या उसमें एक्सपेंशन कार्ड मौजूद है। बाद में हम अपने कंप्यूटर को अपडेट कर सकते हैं या नहीं? कभी-कभार हमारे मदर बोर्ड में प्रॉब्लम आ जाने पर जैसे वीडियो कार्ड या फिर साउंडकार्ड काम नहीं करता तो ऐसी स्थिति में हम अपने कंप्यूटर को बड़ी आसानी से कम पैसे में बना सकते हैं।


Computer Generation | कंप्यूटर की पीढ़ियां

कंप्यूटर का विकास यूं ही अचानक नहीं हो गया। इसका विकास बहुत लंबे समय तक जटिलताओं से होकर गुजरा है। इसकी यात्रा में बहुत सी पीढ़ियां आई। इन पीढ़ियों के बारे में अब हम एक-एक करके अध्ययन करते हैं।

कंप्यूटर की पीढ़ियों के समय काल पर काफी विवाद है, बहुत सी किताबों में अलग-अलग दर्शाया गया है तो यहां पर आपको घबराने की जरूरत नहीं है  ऐसे सवाल आपको एग्जाम में नहीं पूछे जाएंगे .

Zero generation |  जीरो जनरेशन

1942 से 1945 इस समय अंतराल पर बनी सभी कंप्यूटरों को 0 पीढ़ी का कंप्यूटर कहा जाता है। यह कंप्यूटर यांत्रिक कंप्यूटर कहलाते थे। इस पीढ़ी के कंप्यूटर की मूल संरचना डाटा संग्रहण इनपुट आउटपुट पंच कार्ड द्वारा होता था और इन पीढ़ी के कंप्यूटर के लिए प्रोग्राम लेडी ऐडा अगस्ता लव लेस  ने असेंबली भाषा में लिखा था। इस पीढ़ी के प्रमुख कंप्यूटरों में पास्कल की मशीन , डिफरेंस इंजन, मार्क वन, एनालिटिकल इंजन आदि थे।

Frist Generation | प्रथम पीढ़ी  1945 से 1955। Vacuum tube

प्रथम पीढ़ी में इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर का निर्माण किया गया और इस पीढ़ी के सर्किट निर्माण में निर्वात बल्बों का प्रयोग किया गया और इस पीढ़ी के कंप्यूटर का आकार अत्यंत विशाल बहुत भारी और जटिल हुआ करते थे, जिन्हें चलाने के लिए काफी देखने की आवश्यकता पड़ती थी। साथ ही अत्यधिक बिजली की आवश्यकता पड़ती थी। यह पीढ़ी के कंप्यूटर कम विश्वसनीय थे जिनमें कभी भी फाल्ट आ जाती थी और साथ ही इस पीढ़ी के मुख्य कंप्यूटर ENIAC, UNIVAC, ADVAC आदि थे।

Second Generation | 1955 – 1965 | ट्रांजिस्टर

इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में निर्वात बल्बों की आस्थान पर ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया गया। ट्रांजिस्टर अधिक विश्वसनीय होते हुए के साथ-साथ आकार में बहुत छोटे हुए करते थे। इस कारण से द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटरों का आकार काफी कम और बिजली भी कम लेते थे। इस पीढ़ी में उच्च स्तरीय भाषाओं हाई लेवल, लैंग्वेज, मैग्नेटिक, मैग्नेटिक डिस्क आदि का निर्माण हुआ। इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में। पीडीपी-1 , 6600 , 7990  आदि है। मिनी कंप्यूटर का जन्म इसी पीढ़ी से शुरू हुआ।

Third Generation | 1965- 1971 | Integrated Circuit 

थर्ड जनरेशन के कंप्यूटर में इंटीग्रेटेड सर्किट का प्रयोग किया गया जिसे हम संक्षिप्त रूप में आई सी के नाम से जानते हैं। यह एक छोटी सी सिलिकॉन धातु की चिप होती है जिस पर सैकड़ों ट्रांजिस्टर लगाई जा सकती है। इसके अविष्कार से कंप्यूटर हार्डवेयर के क्षेत्र में क्रांति आई जिससे कंप्यूटर का आकार वजन कम हुआ। साथ ही साथ क्षमता में भी बढ़ोतरी देखी गई। इस पीढ़ी में ही मॉनिटर, प्रिंटर ,हार्ड डिस्क, कीबोर्ड अन्य भंडारण युक्तियों का विकास हुआ। इस  पीढ़ी के मुख्य कंप्यूटर है आईबीएम 360, 4300 , 3080  आदि।

Fourth Generation – चौथी पीढ़ी।  1971-1985 | Microprocessor

कंप्यूटर की चौथी पीढ़ी में माइक्रो प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया। इसमें लाखों ट्रांजिस्टर को एक ही चिप पर लगाया गया और इस प्रकार से सीपीयू को बनाया गया इसी पीढ़ी में RAM , ROM , कलर मॉनिटर,  स्केनर माउस,  ऑडियो वीडियो सिस्टम ,  माइक्रो प्रोसेसर के निर्माण हो जाने के बाद कंप्यूटर के क्षेत्र में क्रांति आ गई जिससे कंप्यूटर की कार्य करने की क्षमता हजारों गुना बढ़ गई। साथ ही इसका आकार भी बहुत छोटा हो गया।

Fifth Generation । 1985  – Present । Artificial intelligence

इस पीढ़ी के कंप्यूटर की प्रोसेसिंग क्षमता डाटा भंडारण तथा मुख्य मेमोरी की भंडारण क्षमता को प्रत्येक वर्ष वृद्धि दर्ज की जा रही है। इस पीढ़ी के बहुत शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर लैपटॉप टॉप डिजिटल डायरी। आदि का आविष्कार हुआ। ईस पीढ़ी में वेब कैमरा, एसएसडी ,माइक्रोफोन , कैश स्मृति आदि का आविष्कार किया गया, पंचम पीढ़ी के कंप्यूटरों में डेस्कटॉप, कंप्यूटर, लैपटॉप, कंप्यूटर आदि मुख्य उदाहरण है।

मेमोरी की छमता

दोस्तों क्या आपको पता है कंप्यूटर केवल मशीनी भाषा को ही समझ सकता है? मतलब कंप्यूटर केवल 2 अंकों अर्थात 0 और 1 का ही प्रयोग करता है। इसे हम बाइनरी संख्या कहते हैं, इस प्रणाली के सारे अक्षरों तथा चिन्हों को जीरो और वन के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। उदाहरण के लिए आ चाहे जितनी  बड़ी संख्या क्यों ना लिख दे लेकिन कंप्यूटर अपने आप को समझने के लिए उस संख्या को बायनरी संख्या में कन्वर्ट करके अपने पास संरक्षित करेगा। बाद में आपको फिर से वह उत्तर आपकी भाषा में कन्वर्ट करके देगा।

बाइनरी संख्या  को एक bit कहा जाता है और बिट डिजिट Memory का सबसे छोटा रूप है। 8-bit के एक समूह को Byte कहा जाता है तो चलिए आज हम समझते हैं।

4 Bit                    = 1 Nibble

8 Bit                 =   1 Byte

1024 Byte              = 1 Kilobyte 

1024 Kilo Byte    = 1 Mega Byte

1024 Mega Byte = 1 Giga Byte

1024 Giga Byte  = 1 Tera Byte

Memory composition

मेमोरी कंप्यूटर का आंतरिक भंडारण क्षेत्र है। मेमोरी में जमा डाटा तथा निर्देश की प्रोसेसिंग की जाती है तथा बाद में हमें आउटपुट प्राप्त होता है। अतः हम कह सकते हैं मेमोरी कंप्यूटर का एक अभिन्न अंग है।

मेमोरी बहुत सारे सेल में बटी होती है जिन्हें लोकेशन कहा जाता है और प्रत्येक लोकेशन का एक एड्रेस होता है। सारे डांटा और निर्देश कंप्यूटर में बाइनरी कोड के रूप में संरक्षित किए जाते हैं, जिसे 0 अथवा 1 से निरूपित किया जाता है। वन सर्किट का मतलब ON  स्थिति को दर्शाना तथा जीरो सर्किट का मतलब OF  स्थिति को दर्शाता है।


Types Of Memory | मेमोरी के प्रकार

मेमोरी दो प्रकार की होती है , Primary memory & Secondary Memory 

Primary Memory 

प्राथमिक मेमोरी की डाटा भंडारण क्षमता बहुत कम होती है लेकिन इसकी गति बहुत तेज होती है। इस कारण से इस मेमोरी में डाटा लिखने या पढ़ने से सीपीयू को बहुत कम समय लगता है, यह मेमोरी दो प्रकार की होती है।

1. Read Only Memory

यह एक अस्थाई मेमोरी है। इसे परिवर्तित या समाप्त नहीं किया जा सकता। इसमें संग्रहित डांटा व सूचनाएं न तो नष्ट होती है और न ही इस में कोई परिवर्तन किया जा सकता है। यह अनेक प्रकार की होती है जो निम्न है।

a-  Cash memory (कैश मेमोरी)

कैश मेमोरी की भंडारण क्षमता बहुत कम होती है, लेकिन इसकी गति सबसे अधिक मानी जाती है। कैश मेमोरी एक विशेष प्रकार की मेमोरी है जो सीपीयू के सीधे संपर्क में रहती है। वास्तव में कैश, मेमोरी, मेन मेमोरी और सीपीयू के बीच गति और अदरक को दूर करता है क्योंकि सीपीयू की प्रोसेसिंग गति मेमोरी से डाटा प्राप्त करने की गति से बहुत अधिक होती है तो उनके बीच में मौजूद कैश मेमोरी इन दोनों की दूरियों को मिटाती है।

b. RAM (Rendom Access Memory)

यह एक अस्थाई मेमोरी है। यहां डाटा व सूचनाओं को अस्थाई तौर पर रखा जाता है। कंप्यूटर के बंद हो जाने के बाद इसमें संग्रहित डाटा स्वत नष्ट हो जाते हैं,  इसे मुख्य मेमोरी के नाम से भी जानते हैं। क्षमता के आधार पर विभिन्न प्रकार के होते हैं जैसे-  1GB , 2GB , 4GB , 8GB,  16GB  इनको मुख्यतः दो भागों में बांटा जा सकता है।

  • डायनामिक रैम इसके डाटा को बार-बार रिफ्रेश करना होता है तथा यह स्टैटिक रैम की तुलना में सस्ती होती है। जो आजकल प्रयोग में नहीं लाई जाती है।
  • Synchronous RAM । इसके डाटा को रिफ्रेश करने की आवश्यकता नहीं होती है तथा इसकी गति डायनामिक रैम की अपेक्षा अधिक तेज होती है। यह सीपीयू के क्लॉक के अनुसार चलता है। अतः सीपीयू में रैम लेते समय इस चीज को देख लेना बहुत अनिवार्य है जिससे आपकी सीपीयू की स्पीड बहुत अधिक बढ़ जाएगी।

Secondary memory

इसका प्रयोग डेटा एवं सूचनाओं को अस्थाई रूप से संग्रहित करने के लिए किया जाता है। कंप्यूटर बंद हो जाने के बाद भी बेटा  संग्रहित रहता है। इसकी डाटा भंडारण क्षमता बहुत अधिक होती है, लेकिन धीमी भी होती है। इस कारण इस के डाटा को एक्सेस करने में अधिक समय लगता है। प्रयोग करता द्वारा इस में संग्रहित डांटा को प्राप्त कर उसमें परिवर्तन अथवा उसे नष्ट भी किया जा सकता है।

वर्तमान समय में विभिन्न प्रकार की Secondary memory  का प्रयोग किया जाता है जोकि निम्नलिखित है।

Hard Disk

computer kya hai

इसको एलमुनियम की बनी एक डिस्क पर चुंबकीय पदार्थ का लेप लगाकर बनाया जाता है जिस की भंडारण क्षमता बहुत अधिक होती है। कंप्यूटर की सभी फाइलें और प्रोग्राम इसी के अंदर रखे जाते हैं। इस की भंडारण क्षमता निम्नलिखित है। 250Gb, 500GB , 1 Tb आदि हो सकती है। 

नोट-  आजकल हार्ड डिस्क के अस्थान पर SSD का प्रयोग किया जा रहा है जिससे कंप्यूटर की गति बहुत अधिक बढ़ जाती है थोड़ा  महंगा जरूर पड़ता है।

CD (Compact Disk )

कंपैक्ट डिस्क को संक्षिप्त में CD  के नाम से जानते हैं। इसकी भंडारण क्षमता 650mb से 750mb तक होती है। यह प्लास्टिक का बना हुआ गोलाकार में जिसके ऊपर एक पोस्ट चादर चढ़ी होती है जहां पर विशेष प्रकार की सतह होती है। इसमें डाटा लिखने के लिए लेजर किरणों का प्रयोग किया जाता है।

DVD

  सी डी की तरह होता है परंतु इसकी भंडारण क्षमता बहुत अधिक होती है। इसकी क्षमता 4 Gb से लेकर  17 Gb तक हो सकती है। डीवीडी ड्राइव का होना आजकल नए कंप्यूटरों में बहुत ही आवश्यक है।

Pen Drive | पेन ड्राइव

यह Pen आकार की इलेक्ट्रॉनिक मेमोरी है। इसे फ्लैश ड्राइव के नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग यूएसबी पोर्ट में लगाकर डाटा को संग्रहित परिवर्तित या पढ़ने के लिए किया जाता है।

मैग्नेटिक टेप

मैग्नेटिक टेप 2400 से 3600 फीट लंबा पॉलिस्टर का बना हुआ होता है। इसे रिल में लपेटा जाता है और डाटा को जितनी बार चाहे आप लिख सकते हैं या फिर उसे मिटा सकते हैं। इसके लिए मैग्नेटिक स्ट्राइप की आवश्यकता होती है। सभी मैग्नेटिक टेप ड्राइव में दो रील होती हैं। एक रिलेटिव को पढ़ने या लिखने में प्रयोग होता है और दूसरा टेकअप रिल कहलाता है। आजकल मैग्नेटिक टेप का प्रयोग प्रचलन में नहीं है।

फ्लॉपी डिस्क

फ्लॉपी डिस्क प्लास्टिक के वर्गाकार आवरण के अंदर स्थित प्लास्टिक की एक वृत्ताकार डिस्क होती है जिस पर चुंबकीय पदार्थ का लेप लगा होता है। वर्तमान में इसकी लंबाई सवा 3 इंच होती है और फ्लॉपी डिस्क की भंडारण क्षमता 1.44 एमबी से 2.8 एमबी होती है, फ्लॉपी डिस्क आजकल प्रचलन में नहीं है और ना ही कंप्यूटरों में अब देखने को मिलती है। इसका प्रयोग आज से 10 साल पहले किया जाता था।

मेमोरी कार्ड

मेमोरी कार्ड में विभिन्न प्रकार के आंकड़े एवं सूचनाओं को संग्रहित किया जाता है। मेमोरी कार्ड का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में होता है। वर्तमान समय में स्मार्ट फोन में मोबाइल मेमोरी कार्ड का उपयोग किया जाता है। इसमें हम अपनी आवश्यकता, अनुसार, संगीत, वीडियो, मूवी आदि को संग्रहित कर के अपने लिए प्रयोग में लाते हैं। मेमोरी कार्ड को पुनः भरा जा सकता है। अर्थात मेमोरी मेमोरी कार्ड में आवश्यकता के अनुसार गानों को हटाया या नए सिरे से भरा जा सकता है। इसका प्रयोग मोबाइल कैमरा टेबलेट लैपटॉप, MP3 प्लेयर में किया जाता है।


Hardware & Software  (कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर )

Mouse

कंप्यूटर के भौतिक संरचना कल पुर्जों को हार्डवेयर कहा जाता है। कंप्यूटर का वह भाग जिसे हम अपने हाथों से छूकर महसूस कर सकते हैं,  हार्डवेयर कहलाता है उदाहरण के लिए CPU, Monitor, Mouse, Keyboard  इत्यादि।

Software (सॉफ्टवेयर)

software

प्रोग्रामों के समूह को सॉफ्टवेयर कहते हैं जो कंप्यूटर सिस्टम के कार्यों को नियंत्रित करता है, सॉफ्टवेयर मानव और कंप्यूटर के मध्य परस्पर संपर्क स्थापित करने में सहायता प्रदान करते हैं।

हम यह कह सकते हैं कि हार्डवेयर इंजन है सॉफ्टवेयर उसका तेल

सॉफ्टवेयर को मुख्यतः तीन प्रकार में बांटा जा सकता है। System Software , Application software , Utility Software

System Software

प्रोग्रामों का वह समूह जो application software की क्रियाओं को नियंत्रित करता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर कहलाता है। यह कंप्यूटर तथा प्रयोग करता के बीच मध्यम की भूमिका निभाता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर के बिना कंप्यूटर एक बेजान मशीन बन कर रह जाती है। उदाहरण- Windows , Mac Os , linex , Unix , Ubantu  इत्यादि।

Application software

प्रोग्रामों का वह समूह जो किसी विशिष्ट कार्य के लिए तैयार किया जाता है, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कहलाता है।

उदाहरण के लिए वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर इसके उपयोग से हम दस्तावेज का निर्माण संशोधन रूप और आकार में परिवर्तन कर सकते हैं। या फोटोशॉप जहां पर हम एक अच्छी इमेज क्रिएट कर सकते हैं? इस प्रकार से हम बहुत से उदाहरण ले सकते हैं।

Utility Software

यह कंप्यूटर से अशुद्धियों को दूर करने व कंप्यूटर के कार्य को सरल बनाने के लिए सुरक्षा की दृष्टि से बनाया गया सॉफ्टवेयर है।

उदाहरण  – प्रोग्राम बैकअप , एंटीवायरस यूटिलिटी , पब्लिक डोमेन सॉफ्टवेयर  , डिस्क फॉर्मेटिंग , ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर  आदि।


कंप्यूटर के प्रकार

Classification of computer | कंप्यूटर का वर्गीकरण उसके प्रयोग क्षेत्र एवं तकनीक के आधार पर किया गया है। कंप्यूटर के अंदर डाटा जिस रूप में प्रोसेस हो रहा है उसकी गति व अन्य आधार पर कंप्यूटर को तीन भागों में बांटा गया है जो निम्नलिखित हैं।

एनालॉग कंप्यूटर ।  डिजिटल कंप्यूटर |  हाइब्रिड कंप्यूटर ।

एनालॉग कंप्यूटर।

डाटा को एनालॉग सिग्नल के रूप में परिवर्तित करने के लिए प्रयोग करते है ,  इसकी गति बहुत धीमी होती है।

एनालॉग सिग्नल का मान निश्चित नहीं होता यह लगातार परिवर्तित होता रहता है। उदाहरण के लिए तापमान ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट तथा वजन आदि।  इसका प्रयोग स्वास्थ्य विज्ञान, मौसम, विज्ञान तथा यांत्रिक इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों में किया जाता है।

Digital Computer | डिजिटल कंप्यूटर

डिजिटल कंप्यूटर की गति तीव्र होती है, यह करोड़ों गणनायक प्रति सेकंड में करने में सक्षम होते हैं। डिजिटल कंप्यूटर दुधारी पद्धति  0 &1 का प्रयोग किया जाता है। डिजिटल कंप्यूटर कोर्स की आकार क्षमता, वजन कीमत तथा गति के आधार पर निम्नलिखित चार भागों में विभाजित किया जा सकता है।

माइक्रोकंप्यूटर ,  मिनीकंप्यूटर , मेनफ्रेम कंप्यूटर ,  सुपरकंप्यूटर

Micro Computer .

माइक्रो कंप्यूटर आकार में बहुत छोटे व वजन में हल्की होते हैं इसी कारण से यह आजकल बहुत  प्रचलन में भी है।

माइक्रो कंप्यूटर को दो भागों में विभक्त किया गया है।

Desktop Computer

डेस्कटॉप कंप्यूटर ऐसे कंप्यूटर जीने  हम किसी मेज या डेस्क पर रखकर अपना कार्य करते हैं। उनको डेस्कटॉप कंप्यूटर कहा जाता है। इन्हें एक निश्चित स्थान पर रखकर स्विच बोर्ड से कनेक्ट करके हम अपने कार्य को प्रारंभ कर सकते हैं। इन्हें पर्सनल कंप्यूटर पीसी के नाम से भी जाना जाता है। इनका प्रयोग ज्यादातर घरों और छोटे-मोटे व्यापार के लिए किया जाता है।

Laptop लैपटॉप

इन्हें पोर्टेबल कंप्यूटर के नाम से भी जाना जाता है जिसको प्रयोग करता एक स्थान से दूसरे स्थान तक बड़ी आसानी से ले जा सकता है और इन कंप्यूटरों में बैटरी भी लगी हुई होती है जिससे इनकी कीमत पर्सनल कंप्यूटर से थोड़ी अधिक होती है।

Mini Computer

मिनी कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर की तुलना में अधिक शक्तिशाली और अधिक भंडारण क्षमता वाली होते हैं, इनका प्रयोग ज्यादातर रेलवे आरक्षण केंद्र, स्टॉक, एक्सचेंज आदि स्थानों पर किया जाता है, इनमें मल्टी यूजर सिस्टम होता है, अनेक प्रयोग करता को एक साथ सेवाएं प्रदान कर सकता है।

Mainframe computer

यह कंप्यूटर मिनी कंप्यूटर की तुलना में अधिक शक्तिशाली व अधिक डाटा भंडारण क्षमता वाला होता है। मेनफ्रेम कंप्यूटर में एक साथ हजारों प्रयोग करता सेवाएं दे सकते हैं। किसका प्रयोग बड़े व्यापारिक संस्थानों जैसे बैंक आदमी डेटा संरक्षित करने के लिए किया जाता है।

Super Computer

सुपर कंप्यूटर दुनिया का सबसे शक्तिशाली कंप्यूटर माना जाता है इसमें, साधारण कंप्यूटर की तुलना में हजारों लाखों गुना अधिक प्रोसेसिंग एवं डाटा भंडारण क्षमता होती है। एक सुपर कंप्यूटर सेकंड में अरबों खरबों गणनायक कर सकता है। इसमें गलतियां और खराबी की संभावना नगण्य होती है।

note- भारत के द्वारा परम और अनुराग  सुपर कंप्यूटरों का निर्माण किया गया था।

Hybrid Computer

हाइब्रिड कंप्यूटर एनालॉग कंप्यूटर और डिजिटल कंप्यूटर का मिलाजुला रूप है। इसमें डाटा को डिजिटल रूप और एनालॉग रूप में प्रोसेस किया जाता है। इसका प्रयोग भौतिक विज्ञान, स्वास्थ्य विज्ञान, मकैनिक, इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों में किया जाता है।

Server Computer

Server Computer का प्रयोग क्लाइंट की सेवा के लिए किया जाता है जैसे कि आप मेरे ब्लॉग को अगर पढ़ रहे हैं तो मेरे ब्लॉग पर जो डाटा कहीं से रिट्रीव होकर आपके पास आ रहा है, वह सर्वर पर ही रखा हुआ है।


Computer की विशेषताएं

Speed (गति)

 कंप्यूटर एक सेकंड में लाखों-करोड़ों गणनायक कर सकता है। कंप्यूटर प्रोसेसर की स्पीड को  Mhz  मे नापते हैं। कंप्यूटर सैकड़ों मनुष्यों द्वारा किए जाने वाले कार्य को कुछ मिनटों में ही पूरा कर लेता है।

Automation (स्वचालित)

कंप्यूटर एक स्वचालित मशीन है जिसमें गणना के दौरान मानवीय हस्तक्षेप की संभावना न के बराबर रहती है। हालांकि कंप्यूटर की कार्य करने के निर्देश मनुष्य द्वारा दिए जाते हैं किंतु एक बार आदेश दिए जाने के बाद वह बिना रुके ही लगातार कार्य कर सकता है।

Accuracy (त्रुटि रहित कार्य )

कंप्यूटर के बिना किसी गलती के कार्य करने में सक्षम है। अगर किसी प्रकार की गलती पाई जाती है तो वह प्रोग्राम या मानवी त्रुटियां हो सकती है, कभी  वायरस के कारण भी कंप्यूटर में कुछ त्रुटियां पाई जाती है।

High storage (उच्च संग्रहण क्षमता)

कंप्यूटर में डाटा संग्रहण की क्षमता बहुत अधिक होती है, कंप्यूटर में डाटा को हम कई वर्षों तक। संग्रहित कर के रख सकते हैं और उन्हें जरूरत पड़ने पर प्राप्त भी कर सकते हैं।

Quick Decision (जल्द निर्णय लेने की क्षमता )

कंप्यूटर आपके दिए गए निर्देशों के अनुसार बहुत जल्दी निर्णय लेने की क्षमता रखता है

Agility (स्फूर्ति)

कंप्यूटर एक मशीन होने के कारण थकान तथा बोरियत महसूस नहीं करता और उसे बार-बार रिस्क लेने की जरूरत ही नहीं पड़ती। वह लगातार इस फुर्ती से कार्य करता रहता है।

Deligence

कार्य की एकरूपता कंप्यूटर बार-बार एक ही कार्य को करता रहता है। इससे को किसी कार्य में उबन महसूस नहीं होती, ना ही उसकी गुणवत्ता पर कोई फर्क पड़ता है।

Secrecy (गोपनीयता)

कंप्यूटर में पासवर्ड का प्रयोग करके हम अपने फाइल को गोपनीय बना सकते हैं जिससे, पासवर्ड जानने वाला व्यक्ति ही उस फाइल को ओपन कर सकता है।


Limitation of computer | कंप्यूटर की सीमाएं

Lack of common sense (सामान्य बोध की कमी)

कंप्यूटर के अंदर सामान्य बोध नहीं होता,  वह आपके द्वारा दिए गए निर्देशों पर ही कार्य करता है।

Expensive (खर्चीला )

कंप्यूटर के हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर का भी महंगे होते हैं। समय के साथ-साथ इस में परिवर्तन करना भी आवश्यक होता है।

Lack of intelligence

बुद्धिमता की कमी  कंप्यूटर में सोचने और निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है। केवल वह दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य को संपन्न करता है।

Virus Attack (वायरस से नुकसान)

कंप्यूटर पर वायरस अटैक से काफी नुकसान हो सकता है जिससे आपका सुरक्षित डाटा भी किसी दूसरे व्यक्ति के हाथों में आ सकता है इसके लिए आपको एंटीवायरस का प्रयोग करना चाहिए।

विधुत की खपत

कंप्यूटर को सुचारू रूप से चलाने के लिए विद्युत की आवश्यकता पड़ती है। बिना विद्युत के हम कंप्यूटर को चला नहीं सकते ।

  • इसे भी पढ़े – नया कंप्यूटर खरीदते समय क्या सावधानी रखे। 

कंप्यूटर के अनुप्रयोग

कंप्यूटर का प्रयोग आजकल सभी क्षेत्रों में किया जा रहा है। वर्तमान में शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र है जहां कंप्यूटर का प्रयोग न किया जा रहा हो। निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रयोग किए जा रहे हैं।

Bank (बैंक)

कंप्यूटर ने बैंक के क्षेत्र में क्रांति ला दिया है, आज कल बैंक की लगभग सभी कार्य पैसे गिनना। चेक बुक, ऑनलाइन, बैंकिंग, पासबुक, इंट्री इत्यादि कामों को एकदम सरल बना दिया है।

Digital Library (पुस्तकालय)

आजकल कंप्यूटर के द्वारा डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण किया जा रहा है जहां पर लाखों किताबों को एक छोटे से पीसी में संरक्षित करके रख दिया जाता है। और इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के किसी कोने से उसे जा सकता है।

Medicine (चिकित्सा)

शरीर के अंदर मौजूद रोगों के बारे में पता लगाने के लिए आजकल कंप्यूटर का अत्यधिक प्रयोग किया जा रहा है। जैसे अल्ट्रासाउंड एक्स-रे विभिन्न जांचों में कंप्यूटर का प्रयोग करा जा रहा है।

Defence (रक्षा)

 रक्षा अनुसंधान, मिसाइल, रडार आदि में कंप्यूटर का प्रयोग किया जा रहा है, जहां से दुश्मन की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है।

Recreation (मनोरंजन)

मनोरंजन के क्षेत्र में सिनेमा टेलीविजन के कार्यक्रम व गेम। आदि। को प्रभावी तरीके से कंप्यूटर के माध्यम से ही प्रस्तुत किया जा रहा है।

Railway Reservation (रेलवे आरक्षण)

कंप्यूटर की सहायता से आप रेलवे का टिकट घर बैठे ही बुक कर सकते हैं।

Education

कंप्यूटर ने एजुकेशन के क्षेत्र में क्रांति ला दिया है। आज कोरोना महामारी के चलते शिक्षा का डिजिटलाइजेशन हो चुका है। और बच्चे घर पर ही ऑनलाइन क्लासेस ले रहे हैं। यह इसलिए पॉसिबल हो सका क्योंकि कंप्यूटर यह कंप्यूटर की मौजूदगी के कारण ही संभव हो सका।

सूचनाओं का आदान प्रदान

आजकल कंप्यूटर की सहायता से इंटरनेट का प्रयोग करते हुए हम अपनी सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से भेज सकते हैं।

प्रकाशन

प्रकाशन के क्षेत्र में अनुप्रयोग  प्रकाशन के क्षेत्र में कंप्यूटर का बहुत अधिक योगदान है, जहां छपाई का कार्य बड़ी आसानी से आकर्षक तरीके से किया जाता है।

अध्यापन में भूमिका

आजकल कंप्यूटर अध्यापन में भूमिका निभा रहा है। दूरस्थ शिक्षा के अध्ययन में विद्यार्थियों को शिक्षक द्वारा किसी एक स्थान पर बैठकर कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है।

Data Processing (डाटा प्रोसेसिंग)

बड़े और विशाल डाटा सांख्यिकी को सूचना में तैयार करने के लिए कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है जैसे- जनगणना ऑनलाइन एग्जाम रिजल्ट। वर्तमान समय में अपने देश में सभी परीक्षाएं ऑनलाइन होती जा रही है और साथी रिजल्ट भी ऑनलाइन आने लगा है  इसका पूरा श्री कंप्यूटर को ही जाता है।

दोस्तों आज आपने सीखा कंप्यूटर क्या है इसकी संपूर्ण जानकारी हिंदी में।

आप ने बहुत ही विस्तार से कंप्यूटर की एक-एक टॉपिक का अधयन किया है मुझे उम्मीद है कि आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा और इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद आपको किसी और लेख को पढ़ने की आवश्यकता नहीं होगी।

उम्मीद करता हूं कि आपको कंप्यूटर के सभी सवालों के जवाब ऊपर मिल गया होगा ,

  1. कंप्यूटर क्या है?
  2. मेमोरी क्या है और यह कितने प्रकार की होती है?
  3. कंप्यूटर की क्या-क्या विशेषताएं हैं?
  4. कंप्यूटर की कार्य प्रणाली क्या है?
  5. कंप्यूटर का उपयोग और अनुप्रयोग क्षेत्र कौन कौन सा है?
  6. कंप्यूटर के इतिहास और विकास पर प्रकाश डालिए।
  7. कंप्यूटर की सीमाएं कौन-कौन सी है? स्पष्ट कीजिए?
  8. आधुनिक कंप्यूटर का जनक किसे कहा जाता है?
  9. इनपुट डिवाइस क्या होती है? कंप्यूटर सिस्टम में प्रयुक्त होने वाली इनपुट डिवाइस का वर्णन कीजिए।
  10. सिस्टम सॉफ्टवेयर से आप क्या समझते हैं? सिस्टम सॉफ्टवेयर का उदाहरण दीजिए।
  11. हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में क्या अंतर है? सॉफ्टवेयर की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए?
  12. इनपुट डिवाइस से आप क्या समझते हैं किन्ही तीन इनपुट डिवाइस का नाम लिखिए।
  13. कंप्यूटर की सबसे तेज मेमोरी कौन सी है?
  14. सिस्टम सॉफ्टवेयर क्या है, इसकी क्या कार्य है?

इस प्रकार के सैकड़ों सवालों का जवाब आपको मिल जाएगा। अगर आप पूरा लेख पड़ेंगे तो?

दोस्तों आज आपने सीखा Computer क्या है और इसके क्या क्या फायदे है आप को हमारा ये लेख कैसा लगा कमेंट करके बताना न भूले अगर कोई सुझाव हो तो अवश्य दे धन्यवाद।


2 Comments

Sweety · September 4, 2020 at 5:59 PM

Computer ki bahot acchhi jankari hai. Thanks sir

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