चंदा मामा-चंदा मामा दूर के होते हुए भी एक अधर्मी की मदद करने पृथ्वी लोक पर आगये फिर क्या …

Spread the love
chanda mama ki kahani-chanda mama stories
chanda mama ki kahani

जिसे देखकर सारे गांव वाले आवक रह गए ,भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती भी उस लंगड़े की यह प्रवृत्ति देखकर बहुत ही दुखी हुए और उसको सबक सिखाने के लिए सोचा और वह दिन प्रतिदिन और दरिद्र होता जा रहा था अपने ही कर्मों की वजह से |chanda mama, chanda mama dur ke, chanda mama door ke, chanda mama ki kahani, chanda mama book

अपनी दिनचर्या की शुरुआत सुबह भगवान सूर्य नमस्कार से करता था | जिससे सारे देवता तो दुखी रहते थे लेकिन भगवान सूर्य उसे प्रसन्न रहते थे क्योंकि जाने अनजाने में कहीं ना कहीं वह उनकी पूजा करता था |

सारे देवता गण उसकी दरिद्रता को देख कर खुश थे लेकिन भगवान सूर्य को यह बड़ा बुरा लग रहा था क्योकि वह उनकी उपासना करता था |

जिसको लेकर अगले दिन भगवान सूर्य ने चंदा मामा को बुलाया चंदा मामा जैसे पास में आए उनको सारी घटना बताई और कहा कि उस लंगडे व्यक्ति को धनवान व्यक्ति बना दो ,

जिसको सुनकर चंदामामा तो एक बार तैयार नहीं हुए लेकिन बार-बार सूर्य की जिद करने के कारण चंदा मामा को तैयार होना पड़ा लेकिन चंदा मामा ने एक शर्त रखी | कि मैं सीधे-सीधे उसको धन-दौलत नहीं दूंगा मैं इन हीरे और जेवरात को उसके रास्ते में फैला के रख दूंगा जिससे वह अगर उसकी किस्मत में होगा तो लेलेगा अन्यथा मैं सारा धन वापस उठा लाऊंगा |chanda mama, chanda mama dur ke, chanda mama door ke, chanda mama ki kahani, chanda mama book

सूर्य भगवान् राजी हो जाते है कि धन सामने देखके कौन नहीं उठाएगा | फिर क्या अगले दिन दोपहर का समय था और वह लंगड़ा व्यक्ति पगडंडियों से होते हुए पहाड़ियों के बीच जो रास्ता था उससे गुजर रहा था तभी चंदा मामा उसके रास्ते में कुछ दूरी पर पोटली लेकर पहुंचते हैं और उसमें से सारे हीरे और जेवरात निकालकर जमीन भी बिखेर देते हैं कि वह जाते वक्त देखेगा और उन्हें ले लेगा फिर क्या चंदा मामा जाकर वही पास में छिप जाते और देखते रहते हैं ! सूर्य भगवान भी पूरी घटना देख रहे थे |

जैसे ही वह लंगड़ा व्यक्ति उस दौलत के करीब पहुंचा उसने यह सोचा कि मैं तो लंगड़ा हूं लेकिन आज देखता हूं कि अंधे व्यक्ति कैसे चलते हैं फिर क्या उसने अपनी आंखें बंद कर ली और आंखें बंद करके चलने लगा और उस रास्ते में रखी दौलत छूट जाती है और वह घर की तरफ चला जाता है जिसे देखकर चंदा मामा को हंसी आती है और दूसरी तरफ सूर्य भगवान को बहुत गुस्सा आता है

chanda mama, chanda mama dur ke, chanda mama door ke, chanda mama ki kahani, chanda mama book

फिर क्या चंदा मामा पूरी धन दौलत को समेट की वापस चले जाते हैं | कुछ दिन बीत जाने के बाद फिर से सूर्य भगवान एक बार चंदा मामा से आग्रह करते हैं | कि आप उस हमारे भक्त को एक बार और मौका दीजिए |

चंदा मामा को यह बात बहुत बुरी लगी कि मैं जो यह काम जो कर रहा हूं यह विधि के विधान के विरुद्ध है क्योंकि देवताओं ने उसकी किस्मत में यही लिखा है | वह वयक्ति अपने बुरे कर्मो के प्रभाव से धनवान नहीं बन सकता | लेकिन सूर्य भगवान की जिद से चंदामामा हार जाते हैं |

और जाने के लिए तैयार होते हैं इस बार चंदामामा उस लंगडे व्यक्ति के सामने प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होते हैं और उसे एक जादुई छड़ी प्रदान करते हुए कहते हैं कि तुम इसका प्रयोग करके अपनी दो इच्छाएं पूरी कर सकते हो बस तुम्हें इस छड़ी को घुमाना है और घुमाकर कहना है ” चंदा मामा चंदा मामा मुझे धन दौलत दो ” या इसके स्थान पर जो चीज भी तुम्हें मांगनी है उसका नाम तुम पुकार सकते हो !

लेकिन याद रखना जो चीज तुम अपने लिए मांगोगे वह चीज गांव वालों को भी स्वतः मिल जाएगी वो भी दुगनी मात्रा में ! अगर तुम अपने लिए एक हार मांगते हो तो पूरे गांव वालों को दो हार मिलेंगे तो उस समय वह लंगड़ा बड़ा प्रसन्न होता है और वह छड़ी लेकरके घर की तरफ चला जाता है |chanda mama, chanda mama dur ke, chanda mama door ke, chanda mama ki kahani, chanda mama book,chanda mama stories

chanda mama stories
chanda mama

चंदा मामा और सूर्य भगवान उसके अमीर होने का इंतजार करने लगते हैं जिसे देवता भी बड़ी बारीकी से देख रहे होते हैं |

होता क्या है ? महीनों बीत जाते हैं लेकिन वह लंगड़ा व्यक्ति अमीर नहीं बनता है ना ही उस छड़ी का प्रयोग करता है जिसको लेकर चंदा मामा बड़े चिंतित हो जाते हैं |

कि हमने छड़ी दिया अभी तक उसने प्रयोग नहीं करा और सूर्य भगवान को गुस्सा आ रहा था जैसे-तैसे दिन बीतते गये एक दिन उस लंगड़े व्यक्ति का अपने पड़ोसी से झगड़ा हो जाता है झगड़े के दौरान मारपीट की स्थिति आ जाती है |

पडोसी द्वारा धक्का दे दिए जाने से लंगड़ा जमीन पर गिर जाता है | फिर वह कहता है मैं कि रुको मैं अभी तुमको सबक सिखाता हूँ तुरंत उसने छड़ी निकाली और कहता है चंदा मामा -चंदा मामा मुझे एक “आंख का अन्धा “बना दो फिर क्या लंगड़ा एक आंख का अन्धा हो जाता है और पूरे गांव वाले दोनों आंख से अंधे हो जाते हैं |

लंगड़ा ख़ुशी का ठीकाना नहीं था खुशी-खुशी अपने घर को लौटता है और घर पहुंचते ही पैरों तले जमीन खिसक जाती है ? लंगड़ा देखता है कि उसके दो बच्चे बैठे हुए हैं दोनों आंखों से अंधे हैं और उसकी पत्नी भी दोनों आंखो से अंधी बैठी हुई है | chanda mama, chanda mama dur ke, chanda mama door ke, chanda mama ki kahani, chanda mama book

फिर क्या लंगड़ा के ऊपर मानो जैसे पहाड़ टूट जाता है जिसकी यह करामात सारे देवता और साथ ही साथ चंदा मामा और सूर्य भगवान भी देख रहे हैं और इस तरह से लंगड़े के ऊपर घर की सारी जिम्मेदारी आ आती है |

अब क्या रंगरा बड़ी चिंता में पड़ा अब क्या करें एक तरफ तो वह अपने घर परिवार को देख चिंतित था दूसरी तरफ हो गांव वालों को सबक भी सिखाना चाहता था |

अंत में थक हारकर लंगड़े ने फिर से छड़ी का प्रयोग किया और कहा चंदा मामा चंदा मामा मेरी एक आंख सही कर दो फिर लंगड़े की एक आंख सही हो जाती है और पूरे गांव वाले दोनों आंख सही हो जाती हैं और इस प्रकार से इस कहानी में लंगडे को पास धनवान बनने के इतने मौके मिलते है लेकिन उसे कुछ नहीं मिलता |

उसके बुरे कर्मों का नतीजा था कि वह धनवान होने के मौके मिले लेकिन किसी भी मौके का फायदा नहीं उठा पाया जिसको देख कर बहुत दुखी हुए और सूर्य भगवान को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने कहा की तुम्हे अपने कर्मों का फल मिल रहा है |

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को उसके बुरे कर्मों का फल यही मिलता है |

जैसे लंगड़ा उसे अब धनवान व्यक्ति बनने की इतनी मौके मिले लेकिन वह किसी मौके क्या फायदा नहीं उठा सका |

व्यक्ति को हमेशा अच्छे कर्म करना चाहिए जिससे उसका भला हो|

Leave a comment