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क्या भूत हमें हानि पहुंचते है ? आज आप पढ़ेंगे Real Bhoot Wali Kahani जो आप को भूतो के बारे में सोचने को मजबूर कर देंगी और आप की सोच भी बदल जाएगी।

चुड़ैल और रमेश का प्यार

पहलवान और शैतान

Bhoot Wali Kahani

1. पहलवान और शैतान के बीच कुश्ती

एक गांव में एक पहलवान रहता था जिसका नाम बच्चा पहलवान था । बच्चा पहलवान काफी बुद्धिमान और बलशाली भी था।

एक दिन गांव से दूर पहाड़ी के पास एक दंगल प्रतियोगिता का आयोजन होता है। और उस आयोजन को लेकर दूर-दूर से पहलवान कुश्ती के लिए आते हैं ।

इस प्रतियोगिता में बच्चा पहलवान भी भाग लेने के लिए आता है। प्रतियोगिता का प्रारंभ ढोल-नगाड़ों की शुरुआत के साथ की जाती है। किसकी शुभारंभ वहां के राजा करते हैं।

प्रतियोगिता शुरू होने वाली थी। तभी अचानक एक अजीब सा पहलवान भारी-भरकम शरीर का। इस प्रतियोगिता में आकर भाग लेता है। लेकिन किसी को यह पता नहीं था कि यह पहलवान कौन है ? और कहां से आया है ?  वह पास के घने जंगलों से निकलकर ही उस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आया था ।

ह एक शैतान था जो पास के जंगल में रहता था !

इस प्रतियोगिता को देखने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ इकट्ठा हो चुकी थी और सभी लोग अपने अपने गांव से आए पहलवान को उत्साहित कर रहे थे तथा उनके नाम के जैकारे लगा रहे थे ।

कुश्ती की शुरुआत में सबसे पहले जंगल से आए शैतान पहलवान और गांव से आए कुछ पहलवानों के बीच शुरू कर दी जाती है। विशाल शैतान ने एक-एक पहलवान को पटक मारा सभी पहलवानो के हौसले छूट गए । शायद इतना बड़ा पहलवान पहली बार देखा था !

वह पल भर में तुरंत ही पहलवानों को चित कर देता था। इसका किसी भी पहलवान के पास कोई तोड़ नहीं था और बड़ी आसानी से वे उस शैतान के सामने अपनी हार मान लेते है ।

क्या शैतान हारेगा आगे जरूर पढ़े

सभी गांव वालों की उम्मीदें टूटती चली गई। अंत में नंबर आता है बच्चा पहलवान का ! जो कि पास के ही गांव से आया हुआ था। बच्चा शैतान की कमियों को बड़ी बारीकी से देख रहा था ।

बच्चा पहलवान यह देखता है कि वह विचित्र सा जंगली पहलवान अपने बाएं पैर के घुटने को हमेशा कुश्ती के दौरान बचाता रहा था ।

पहलवान शायद अब समझ चुका था कि शायद उसके पैर में चोट लगी हो इसी लिए बचा रहा । फिर सोचा उसकी दुखती हुई नस को हम टारगेट कर कर इस पहलवान को हरा सकते हैं?

बच्चा पहलवान और शैतान के बीच कुश्ती शुरू होती है और जिसका कोई रिजल्ट आता नहीं दिख रहा था कुश्ती बहुत ही भयानक थी जिसे देख सभी लोग दांग रह जाते है ।

तभी बच्चा पहलवान उसके बाएं पैर के घुटनों को टारगेट करना शुरू किया और इस प्रकार से वह शैतान जमीन पर गिर जाता है।बच्चा पहलवान उसे दबोच लेता है । उसे दबोचने के बाद उसे पीठ की तरफ पलट के चित्त कर देता है। शैतान हर चूका था ।

शैतान जिससे भी पराजित होते है उसके गुलाम बन जाते है ये सत्य है ! अब से वह गुलाम शैतान बच्चा को अपना राजा मानता है और उसके घर के सरे कामकाज भी देखता था।

 तो ऐसे थे बच्चा पहलवान जिनके शैतान भी गुलाम हुआ करते थे ! अगर आप शक्तिशाली होने के साथ-साथ में बुद्धिमान भी हैं तो आपका कोई बुरी आत्मा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।

कैसी लगी Bhoot Wali Kahani अब आप की बारी कमेंट करना न भूले।

Bhoot wali kahani
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Bhoot Wali Kahani

2. रेल की पटरियों वाली चुड़ैल और रमेश .

भूतों की इस कहानी में आपका स्वागत है यह जो कहानी आज मैं आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं जी राजस्थान के रहने वाले रमेश ने हमें भेजी है लेकिन रमेश आजकल उत्तर प्रदेश में रहा करते हैं।

सन 1991 की बात है रमेश जी अक्सर ट्रेन से सफर कर के घर आया करते थे रमेश 100km दूर शहर जॉब करते थे और वहां से यह अक्सर हफ्ते में एक बार ट्रेन से सफर करके शनिवार के दिन घर को आया करते थे।  इनका घर स्टेशन से थोड़ी दूरी पर था तकरीबन 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर था तो यह ट्रेन से उतरकर अक्सर घर की तरफ पैदल ही जाया करते थे !

एक दिन ट्रेन बहुत विलंब हो गई और गर्मियों का मौसम था और चांदनी रात थी आमतौर पर ट्रेन 10:00 बजे तक पहुंच जाती थी ! लेकिन आज तकरीबन 12:30 से 1:00 बज चुके थे  रमेश पैदल ही ट्रेन की पटरियों पर चलते हुए अपने घर की तरफ निकल पड़े तभी कुछ दूर चलने के बाद इन्हें कुछ आभास हुआ कि इनकी पीछे-पीछे भी कोई आ रहा है !

लेकिन इन्होंने कुछ पीछे देखने की हिम्मत नहीं ,”करी फिर से आगे जाने के बाद इन्हें लगा अभी भी मेरे पीछे कोई आ रहा है तब पीछे मुड़कर देखें तो एक लड़की जिसकी उम्र लगभग २२ वर्ष होगी कंधे पर बैग टांगकर इनके पीछे-पीछे आ रही थी अब इनके मन में बहुत ढेर सारे सवाल उठने लगे कि यह लड़की अकेले कैसे आ रही है इसके साथ कोई नहीं है।

इतनी रात हो चुकी है तो यह काफी शर्मीले स्वभाव के थे इसलिए कुछ पूछने से डर रहे थे लेकिन जैसे-तैसे इन्होंने हिम्मत जुटाकर आखिर में पूछ ही लिया कि आप कैसे और कहां जा रही हैं।

तो उसने आदर भाव से बताया कि मेरा नाम रानी है , और मैं यही कुछ दूरी पर सड़क के किनारे मेरा मकान है हॉस्टल से घर आरही हूँ बाहर रह के पढाई करती हूँ । 

रमेश ने कहा आप मेरे साथ चलिए मैं सुरक्षित आपको आपके घर छोड़ दूंगा इस प्रकार रमेश रानी को उसके घर छोड़कर अपने घर की तरफ निकल पड़ता है और इस प्रकार से उसकी दोस्ती रानी से हो जाती है।  वह अक्सर रमेश से मिलने लगी जब भी रमेश आने में लेट कर देता था, इस प्रकार से इनकी दोस्ती और प्रगाढ़ होती चली गई  और रमेश रानी को चाहने लगा था ।

एक शनिवार रानी रमेश से नहीं मिलती है फिर अगला शनिवार आता है तब जी रानी रमेश से नहीं मिलती है रमेश को बड़ी चिंता हो जाती है कि आखिर रानी अब मुझसे क्यों नहीं मिलती है ,” वैसे प्रत्येक शनिवार को मुझे प्लेटफार्म से घर की तरफ आते वक्त मिलती थी ।

Bhoot Wali Kahaniजब रमेश करने लगा चुड़ैल से प्यार ..

रानी का रमेश से मिलने ना आना रमेश को बहुत बुरा लगा अंततः रमेश ने यह निर्णय लिया कि अब रानी के घर ही चल कर देखना पड़ेगा अगली सुबह वह रानी के घर के सामने पहुंचता है , “उसकी नजर छत पर खड़ी रानी पर पड़ती है तो वह नीचे से दरवाजा खटखटा ता है।

रानी के पिता जी बाहर निकलते हैं तो रमेश कहता है पापा जी कैसे हैं ‘तो पिताजी ने कहा ठीक है बेटा तुम कौन उन्होंने कहा कि पिताजी मैं रानी का दोस्त ! उसके बाद पिताजी घड़ी आराम से सहज भाव से उसको ले जाकर एक कमरे में बैठा देते हैं। उसके बाद उसके लिए एक लड़की पानी लेकर आती है जो रानी जैसी दिख रही थी और रमेश उसी ही रानी समझ रहा था ।  रमेश पढे प्यार से ग्लास को हाथ से पकड़ कर पानी पीने वाला ही होता है कि तभी उसकी नजर दीवाल पर पड़ी एक फोटो फ्रेम पर पड़ती है !

जिस पर माला टंगा हुआ था वह तस्वीर रानी की थी जिसके पास रमेश का पूरा बदन पसीने से भीग जाता है और उसकी मुख से आवाज नहीं निकल रही होती हैं , तभी रानी के पिता आते हैं और उसके सर पर हाथ रख उसे पानी पीना खुद ही पिला देते हैं रमेश की स्थिति थोड़ी नॉर्मल हो चुकी थी ।

तभी रानी के पिता ने उसे बताया कि यह उसकी छोटी बहन सीमा है! और आज से लगभग 2 वर्ष पहले इन्हीं रेल की पटरियों पर रानी की मौत कटकर हो गई थी। अक्सर लोगों को रात में दिख जाया करती है और यहां से गुजरने वाले अनजान व्यक्तियों का सहारा बनकर उन्हें घर तक पहुंचाने में मदद करती है ।

 तो ठीक है रमेश यह बताइए मेरी बेटी कैसी थी तो  जिसे सुनकर रमेश की आवाज ही नहीं आ रही थी लेकिन रमेश ने सारी कहानी बताई कि बहुत अच्छी थी और विनम्र भाव जैसे संस्कार कूट-कूट के भरे हो जिसको सुनकर रानी के पिता की आंखें भर आई !

रमेश दुखी मन से वहां से लौट जाता है और रमेश ने राजस्थान जोड़कर यूपी बसने का निर्णय लिया अब रमेश जी यूपी में ही एक नौकरी करते हैं !

इस कहानी की सत्यता का तो पता नहीं लेकिन Bhoot Wali Kahani रमेश ने भेजी बहुत इंटरेस्टिंग थी इसलिए मैंने इसे अपने पोर्टल पर अच्छी तरीके से आपके सामने प्रस्तुत करने की कोशिश किया कहानी कैसी लगी आप हमें लाइक और कमेंट करना ना भूले !

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नमस्कार दोस्तों मैं अलोक यादव ब्रांडकीकहानी का Author & Co-Founder हूँ। , मुझे कहानी-किस्से सुनने-सुनाने में काफी मजा आता है।
आप के लिए न्यू और मजेदार कहानियां लेकर आता रहता हूँ। आप लोग इसी तरह अपना प्यार बनाए रखिए मैं आप के लिए मजेदार कहानिया लेकर आता रहूँगा।

Alok Yadav

www.brandkikahani.com


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