अकबर-बीरबल की कहानियां

अकबर-बीरबल की कहानियां, AKBAR – BIRBAL STORIES, हाजिर जवाबी और चुनौतियो का जवाब नहीं जो आप को बौद्धिक मानसिक विकास के दरवाजे खोल देता है , बीरबल नवरत्नों में से एक थे जिनकी आज हमारी नयी पीढ़िया उनकी हाजिर जवाबी के कायल है . आप इन कहानियो को जरूर पढ़े और अपने बच्चो को बताये .

सोने की खेती

एक दिन महाराज अकबर के दरबार में काम करने वाले सेवक को जुर्म में फांसी की सजा सुनाई अकबर की इस फैसले से बीरबल बहुत दुखी हुए और वह भरी सभा में खड़े होकर बोले अन्याय है किसी को झूठ बोलने की इतनी बड़ी सजा नहीं दी जा सकती हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी ना कभी झूठ बोलता है जब मुश्किलों का सामना करता है !

अकबर ने बीरबल को भरी सभा में फटकार लगाते हुए कहा कि तुम झूठे व्यक्ति का समर्थन कर रहे हो निकल जाओ मेरे दरबार से “सिपाहियों बीरबल को अपने राज्य से बाहर निकाल फेको “
बीरबल कभी हार मानने वालों में से नहीं था उसने महाराज को सबक सिखाने की एक अच्छी तरकीब लगायी .

एक स्वर्ण व्यापारी के पास जाकर सोने का कुछ अनाज बनवाता है । बीरबल पुनः महाराज अकबर के दरबार में वापस आ जाता है जिसे देखकर महाराज अति क्रोधित हो जाते हैं और कहते हैं तुम यहां क्यों आए हो ।

बीरबल ने कहा कि महाराज मुझे एक महात्मा मिले थे जिन्होंने मुझे कुछ स्वर्ण के बीज दिए हैं जिससे सोने की खेती की जा सकती है आप मुझे अपने दरबार में बस थोड़ी सी जमीन दे दे दरबारी अचरज में पड़ गए और राजा ने बीरबल की बात मान ली !

महाराज अकबर बीरबल और सभी दरबारी खेत पर पहुंचते हैं खेत में पहुंचकर बीरबल ने अपनी जेब से पीच निकालते हुए सभी दरबारियों की तरफ देखते हुए बोले कि आप में से किसी ने अगर जीवन में कभी झूठ ना बोला हो वही इस बीज को लगाएगा तभी यह उगेगा अन्यथा नहीं ।

सभी दरबारी पीछे हट गए किसी में हिम्मत नहीं पड़ी कि आगे बढ़े यह देख अंत में बीरबल ने महाराज अकबर की तरफ इशारा करते हुए कहा कि महाराज आप के दरबार में सभी झूठे और फरेबी हैं कृपया आप ही इस बीज को लगा दीजिए जिसे सुनकर महाराज अकबर लज्जित हो गए और सर नीचे झुका लिया कहा कि मैंने भी बचपन में बहुत झूठ बोले हैं !

अब महाराज को अपनी गलती का एहसास हो चुका था और उन्हें लगा कि झूठ बोलने की सजा इतनी बड़ी नहीं दी जा सकती उन्होंने उस सेवक को माफ कर दिया

निष्कर्ष- किसी से गलती होने पर उसे सुधारने का मौका देना चाहिए टीना हमेशा हितकर नहीं होता है।


एक पेड़ दो मालिक अकबर और बीरबल की कहानी

एक रोज बादशाह अकबर प्रजा की समस्याओं को सुन रहे थे तभी उनकी सभा में सूरत और केशव नाम के 2 किसान आते हैं उनकी विवाद का कारण एक आम का पेड़ था जिस पर दोनों अपना-अपना मालिकाना हक जता रहे थे सूरत और केशव दोनों किसान ही उस पेड़ को अपना बता रहे थे कोई एक दूसरे की बात सुनने को तैयार नहीं था बद भी बड़ी अचरज की स्थिति में पड़ गए उन्हें जब कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने यह मामला बीरबल को दे दिया आज सभा को स्थगित कर दिया अगले दिन दोनों किसान सूरत और केशव सभा में दोबारा मौजूद होते हैं !

बीरबल ने न्याय सुनाते हुए कहा जहांपनाह इस आम के पेड़ को काट दिया जाए और दोनों किसानों को बराबर बराबर बांट दिया जाए मगर दोनों किसानों की सहमति होने के बाद ही बीरबल ने सूरत से पूछा क्या तुम्हें यह शर्त मंजूर है बोला हां महाराज मुझे मंजूर है जैसी आपकी इच्छा मैं आपकी बातों का उल्लंघन नहीं कर सकता !

केशव क्या तुम्हें भी महाराज की शर्त मौजूद है केशव बोला नहीं महाराज मुझे यह शर्त मंजूर नहीं मैं कैसे उस पेड़ को काटने की इजाजत दे दू जिसे मैंने खून-पसीने से सींचा है आप चाहे तो यह पेड़ सूरत को दे दीजिय मुझे कोई आपत्ति नहीं लेकिन महाराज आप से मेरा निवेदन है कि आप इसे बख्श दे जिसे मैंने अपने बच्चे की तरह पाला है ।

बीरबल ने केशव को वह पेड़ सौंप दिया और कहा कि जहांपनाह केशव ही पेड़ का असली हकदार है इन्होंने ही इस पेड़ को लगाया है इन्हें ही इसका दर्द मालूम है चोरी वह झूठ बोलने की जुल्म सूरत को गिरफ्तार कर लिया जाता है !


निष्कर्ष- हमें हमेशा मेहनत और ईमानदारी से कार्य करना चाहिए अन्यथा कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा



तीन गधों का बोझ

एक दिन बादशाह अकबर और उनके दो पुत्र नदी में नहाने के लिए जाते हैं बादशाह अकबर और उनके दो पुत्र नदी में नहाने लगे बीरबल उनके कपड़ों को शरीर पर टांग कर नदी के किनारे खड़ा था था हमेशा बीरबल को तिथि और उसी अंदाज में आज उन्होंने कहा कि तुम ऊपर दो गधों का बोर्ड लगा है मुझे ऐसा लग रहा है बीरबल भी कहां चुप रहने वाले थे तुरंत बोले हुजूर एक नहीं नहीं बल्कि तीन गधों का बोझ हमारे कंधे पर लगा है बीरबल की यह बातें सुनकर बादशाह फौरन चुप हो गए


बीरबल की चालाकी

अकबर बीरबल की चालाकी दिमाग उत्तर देने की प्रतिभा के कायल थे एक दिन दरबार में वह किसी बात से खुश होकर बीरबल को पुरस्कार देने की घोषणा करते हैं लेकिन बीरबल को पुरस्कार देना भूल जाते हैं और महीनों बीत जाते हैं तब बीरबल चिंतित हो जाते हैं कि महाराज को उनका दिया गया वादा कैसे याद दिलाया जाए !


एक दिन महाराज शाम को नदी के किनारे सैर के लिए निकलते हैं मैं बीरबल भी थे तभी महाराज ने एक ऊंट को देखा और बीरबल से पूछा आखिर शरीर पर इतना बड़ा कूबड़ क्यों है !

बीरबल ने कहा महाराज इस उट ने किसी से वादा किया था और उसे निभाना भूल गया इसीलिए उसका शरीर पर कूबड़ निकल गया , जहापनाह भागते हुए राज्य में आते है और बीरबल को उपहार देते हुए माफ़ी मांगते है I


छोटी रेखा- akbar aur birbal ki kahani

छोटी रेखा एक बार बादशाह अकबर ने चौक से जमीन पर एक रेखा खींच दी उन्होंने अने दरबारियों से कहा इस रेखा को छुए बिना कोई इसे छोटा कर सकता है सभी सोचने लगे कि देखा को छुए बिना भला कैसे छोटा किया जा सकता है बीरबल आगे आए और छोटी रेखा के बगल में एक बड़ी रेखा खीच दिया , बिना छुए ही रेखा को छोटा कर दिया सभी लोग बीरबल के प्रतिभा के कायल हो गए और जहापनाह ने उन्हें खुश होकर उपहार दिया !


मुल्लाह दो प्याजा

एक बार मुल्ला दो प्याजा बादशाह अकबर से मिलकर वापस लौट रहे थे कि तभी उनकी जेब से तांबे का एक सिक्का नीचे गिर गया उनके पास वही एक सिक्का था इसलिए वे उसे ढूंढने लगे मुराद नाम का एक दरबारी जो कि मुल्ला का सबसे बड़ा दुश्मन था वह बोला जहांपनाह इस मुल्ला को देखिए यह कितना कंजूस है आपने इसे कितने सारे महंगे तोहफे फिर भी इस तांबे के सिक्के के पीछे पड़ा है, मुल्ला बोला जहांपनाह उस सिक्के के कीमत के पीछे नहीं हूं बल्कि उसे इसलिए ढूंढ रहा हूं क्योंकि उसके एक तरफ आपका चेहरा बना हुआ है और मैं नहीं चाहता कि कोई भी उस पर अपना पैर रखकर जाए जहापनाह इस जवाब से बहुत खुश हो जाते हैं और उसी हीरे की अंगूठी तोहफे में दे देते हैं I


जो होता है अच्छे के लिए होता है

बीरबल अक्सर इस बात का दावा करते थे कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है लेकिन बादशाह अकबर को इस बात पर विश्वास नहीं था 1 दिन बाद शादी अपनी तलवार चलाते समय गलती से छोटी अंगुली कट जाती है बीरबल कहते हैं जो होता है अच्छे के लिए होता है बादशाह यह सुनकर क्रोधित हो जाते हैं और बीरबल को जेल में डाल देते हैं 1 दिन बादशाह शिकार पर निकलते हैं और रास्ता भटक जाते हैं जंगल के आदिवासी अकबर को पकड़ लेते हैं I

आदिवासी बादशाह ले जाकर मंदिर में बांध देते हैं और उनकी बलि चढ़ाने लगते हैं तभी मंदिर का पुजारी बादशाह की अंगुली में लगी हुई पट्टी को देखकर कहता है यह शरीर बलि के योग्य नहीं है छोटी अंगुली कटी होने के कारण यह शरीर तो खंडित है I

आदिवासी बादशाह अकबर को छोड़ देते हैं अकबर बीरबल को जेल से निकालने का आदेश देते हैं उसे कहते हैं तुम्हारी बात सच ही बीरबल अब यह बताओ कि मैंने तुम्हें जेल में डाल दिया तो क्या यह भी ईश्वर की इच्छा थी बीरबल कहते हैं हां यदि आप मुझे जेल में नहीं डालते तो अपने साथ शिकार पर ले जाते और वे आदिवासी मेरी बलि चढ़ा देते इसलिए जो भी होता है हमारे अच्छे के लिए ही होता है

अकबर-बीरबल की कहानियां


ज्ञान का अहंकार

पृथ्वी का चक्कर एक दिन ज्योतिष बादशाह अकबर को अपने ज्ञान के अहंकार में सौरमंडल और पृथ्वी के आकार के बारे में कुछ बता रहा होता है अकबर बीच में बोलते हैं यदि पृथ्वी गोल है तो कोई अगर सीधे-सीधे चलना शुरू करें तो वह वहीं पहुंच जाएगा ना जहां से उसने शुरू किया था ज्योतिष कहता है जहांपनाह तथ्यों के आधार पर यही सही है अकबर कहते हैं तो असल जिंदगी में क्यों नहीं
ज्योतिष कहता है गहरे सागर ऊंचे पर्वत और घने जंगलों को पार करके जाना आसान नहीं है इस पर बादशाह कहते हैं कि सागर को जहाज से पर्वतों को सुरंग से और घने जंगलों को हाथी पर बैठकर पार किया जा सकता है ज्योतिष कहता है यह संभव नहीं है क्योंकि इसमें कई वर्ष लग जाएंगे अकबर की फिर से पूछने पर परेशान होकर ज्योतिष कहता है कि मैं इसकी गणना तो नहीं कर सकता लेकिन शायद 100 वर्ष लग जाएंगे .
बादशाह अकबर दरबार में सभी दरबारियों से इसका जवाब मांगते हैं कोई कहता है 25 साल कोई 50 साल कोई हजार दिन और कुछ कहते हैं कि इसकी गणना करना असंभव है अकबर बीरबल को चुपचाप बैठा हुआ देखकर पूछते हैं बीरबल क्या तुम्हारे पास इसका जवाब है बीरबल कहते हैं जीजा बना मुझे तो केवल एक ही दिन लगेगा बीरबल के इस जवाब से सभी हैरान होकर पूछते हैं
कैसे संभव है बीरबल हंसते हुए कहते हैं यदि सूरज की गति से चला जाए तो यह संभव है


चोर पकड़ा गया

चोर पकड़ा गया धनी व्यापारी के घर चोरी हो गई क्या पारी ने मन में सोचा कि हो ना हो यह चोरी उसके किसी नौकर ने ही की है व्यापारी बीरबल के पास मदद लेने पहुंचा और बताया कि उसे अपने किसी नौकर पर शक है I

बीरबल सभी नौकरों को बुलाते हैं और सभी को बराबर नाप की एक एक लकड़ी देकर कहते हैं कि कल सभी यह लकड़ी मुझे वापस दिखाना जो भी चोर है उसकी लकड़ी 2 इंच और बढ़ जाएगी I

अगले दिन बीरबल ने सभी की लकड़ियां देखी उसमें एक लकड़ी 2 इंच छोटी थी बीरबल ने कहा कि यही चोर है जिसकी लकड़ी छोटी है व्यापारी ने बीरबल से पूछा कि उसे चोर का कैसे पता चला कि बीरबल ने उसे बताया कि चोर को लगा कि उसकी लकड़ी बढ़ जाएगी इसी डर से उसने लकड़ी को 2 इंच छोटा कर दिया और मुझे पता चल गया कि यही चोर है I


महान की पहचान

एक दिन एक धनी व्यक्ति बीरबल को अपने यहां दावत पर बुलाता है जब बीरबल वहां पहुंचता है तो देखता है कि वहां तो पहले से ही बहुत सारे मेहमान आए हुए हैं धनी व्यक्ति बीरबल का सत्कार करते हुए अंदर ले आता है बीरबल कहते हैं कि तुमने तो काफी सारे मेहमानों को आमंत्रित किया है I

धनी व्यक्ति कहता है कि आपके अलावा जहां एक और मेहमान है बाकी सब मेरे कर्मचारी हैं क्या आप बता सकते हैं कि वह मेहमान कौन है बीरबल कहते हैं कि तुम एक चुटकुला सुनाओ और फिर मैं सब को ध्यान से देख कर बता दूंगा कि, तुम्हारा दूसरा मेहमान कौन है ?


व्यक्ति एक घटिया सा चुटकुला सुनाता है और सभी जोर-जोर से हंसने लगते हैं, तभी बीरबल एक आदमी की ओर इशारा करके कहते हैं कि यही है तुम्हारा मेहमान धनी व्यक्ति बीरबल से पूछता है कि उसने कैसे सही मेहमान को पहचान लिया बीरबल कहते हैं कि माफ करना लेकिन तुम्हारा चुटकुला बहुत ही बेकार था और जिस पर सभी कर्मचारी बनावटी हंसी हंस रहे थे बस एक ही व्यक्ति नहीं हंस रहा था तो मैं समझ गया कि यही तुम्हारा मेहमान है I


बीरबल की चित्रकारी

अकबर बीरबल से कहते हैं कि मैं अपनी कल्पना से एक चित्रकारी करें बीरबल कहते हैं कि वह तो एक मंत्री हैं चित्रकार नहीं वह कैसे चित्रकारी कर सकते हैं अकबर गुस्से में कहते हैं कि यदि तुमने 1 सप्ताह में तस्वीर नहीं बनाई तो मैं तुम्हें फांसी पर लटका दूंगा 1 सप्ताह बाद बीरबल कपड़े से ढक कर एक तस्वीर लेकर आते हैं सब खुश हो जाते हैं कि बीरबल ने उनकी बात मान ली I

लेकिन जब बीरबल कंपडे को हटाते हैं तो बाकी दरबारी खुश हो जाते हैं कि अब तो बीरबल हमेशा के लिए इस दरबार से दूर हो जाएंगे उस तस्वीर में केवल जमीन और आसमान बना हुआ होता है और कहीं-कहीं धब्बे अब उस तस्वीर को देखकर अकबर गुस्से में पूछते हैं कि यह क्या बनाया है तुमने ?

जवाब में बीरबल कहते हैं गाय घास खा रही है अकबर पूछते हैं लेकिन गाय और घास
कहां है बीरबल कहते हैं कि मैंने अपनी कल्पना से यह चित्रकारी की है घास को गाय खाकर वापस गौशाला चली गई है। इस प्रकार से सभी का गुस्सा शांत हो जाता है I


बीरबल का मीठा उत्तर

अकबर अक्सर अपने दरबारियों से तरह-तरह की प्रश्न पूछा करते थे लेकिन उन्होंने एक जटिल प्रश्न पूछा कि अगर , कोई मेरी दाढ़ी चीजें तो उसे क्या दंड दिया जाना चाहिए ? एक मंत्री बोला उसे 100 कोड़े मारे जाए दूसरा बोला उसे तो फांसी की सजा दी जाए अन्य मंत्री बोले उसे तो कारावास में डाल दिया जाना चाहिए I

बीरबल को बिल्कुल चुपचाप बैठा देखकर अकबर ने पूछा कि तुम्हारा क्या सुझाव है बीरबल बोले जहांपनाह उसे तो मिठाइयां और उपहार देने चाहिए बीरबल का जवाब सुनकर सभी हैरान रह जाते हैं अकबर गुस्से में बीरबल से कहते हैं कि मेरी दाढ़ी खीचने वाले को तुम मिठाइयां और उपहार दोगे तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ऐसी बात बोलने की ” बीरबल कहते हैं “गुस्ताफी माफ़ करे ” जहांपनाह आपकी दाढ़ी तो आपका पोता ही खींच सकता है कोई और नहीं अकबर बीरबल के इस उत्तर से बहुत प्रसन्न होते हैं ।


akbar aur birbal ki kahaniya, अनुशासन

एक दिन बादशाह अकबर बीरबल से बोले कि मेरी प्रजा मुझे बहुत प्यार करती है इसलिए वह मेरे हर आदेश को पूरा करती है बीरबल हंसकर बोले आप सच कह रहे हैं महाराज आपकी प्रजा आप से डरती भी है अकबर बीरबल की बात से सहमत नहीं हुए और उन्होंने सोचा कि चलो अपनी प्रजा की परीक्षा ली जाए I

बीरबल के निर्देशानुसार यह घोषणा की गई कि बादशाह अकबर शिकार के लिए बाहर जा रहे हैं और बाहर आंगन में एक बड़ा सा बर्तन है जिसमें सभी लोग एक एक लोटा दूध का डाल दें सभी लोगों ने सोचा कि अब तो वैसे भी बादशाह शिकार के लिए बाहर गए हैं तो वह तो देखेंगे नहीं कि किसने दूध डाला और किसने नहीं इसलिए सभी ने उस बर्तन में पानी डाल दिया अगले दिन जब अकबर शिकार से लौटे तो उन्होंने देखा कि बर्तन तो पानी से भरा है I

फिर दोबारा घोषणा की गई कि सभी एक एक लोटा दूध का बर्तन में डालें इस बार बादशाह अकबर स्वयं उसे देखेंगे अगले दिन जब अकबर ने बर्तन को देखा तो वह दूध से भरा हुआ था अकबर बीरबल की बात से सहमत हो गए कहा कि अनुशासन बनाए रखने के लिए डर का होना जरूरी है

अकबर-बीरबल की कहानी


चार मूर्खो की कहानी

एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से कहा कि वह चार महामूर्खों को लेकर दरबार में आए बीरबल ने कुछ दिनों का समय मांगा एक दिन बीरबल ने एक आदमी को देखा जिसके हाथ में एक बड़ा सा संदूक था जिसमें कपड़े गहने और महंगे तोहफे थी बीरबल के पूछने पर वह आदमी बोला कि मेरी पत्नी किसी के साथ भाग गई थी और अभी उसको लड़का हुआ है यह सब चीजें मैं उसी के लिए ले जा रहा हूं बीरबल को पहला मूर्ख मिल जाता है I


फिर कुछ दिनों बाद बीरबल ने भैंस पर बैठे हुए एक आदमी को देखा जिसके सिर पर घास की एक गठरी थी बीरबल के पूछने पर वह बोला कि यह भैंस गर्भवती है और मैं नहीं चाहता कि इस पर और बोझ डाला जाए इसलिए घास की गठरी मैंने अपने सिर पर रखी है बीरबल को दूसरा मूर्ख भी मिल जाता है I

दोनों मूर्खों को लेकर के दरबार में पहुंचता है अकबर कहते हैं कि मैंने तो तुम्हें चार मूर्ख ढूंढने को कहा था और तुम तो दो ही लेकर आए हो बीरबल कहता है तीसरे मूर्ख आप हो जहांपना जो मूर्खों को ढूंढने में लगे हो और चौथा मूर्ख मैं हूं जो उन्हें ढूंढने निकला हूं अकबर बीरबल के इस जवाब पर जोर जोर से हंसने लगते हैं और उसकी खूब प्रशंसा करते हैं I


बीरबल का न्याय

एक बार बादशाह अकबर आम के बगीचे में टहल रहे थे तभी एक तीर उनके पास से गुजरा सेवक एक लड़के को पकड़ कर लाए जिस ने तीर मारा था अकबर ने उससे पूछा तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ?मुझे तीर मारने की वह लड़का डर से कांपते हुए बोला मैं तो आम तोड़ने की कोशिश कर रहा था गलती से तीर आपके पास से चला आया अकबर बोले यदि मैं तुम्हारे दिल से मर जाता तो इसलिए अब तुम्हें भी आम के पेड़ से बांधा जाएगा I और तीर से मारा जाएगा.

सेवक उस लड़के को पेड़ से बांध देते हैं और तीर मारने लगते हैं तभी बीरबल बीच में बोले जहांपनाह आप इसे वैसे ही मारना चाहते हैं ना जैसे इसने तीर मारा था तब तो तीर का निशान आम को लगाना चाहिए गलती से तीर इस लड़के को लगना चाहिए I अकबर को गलती समझ आगई कि जल्दबाजी में उन्होंने गलत फैसला लिया है वह बीरबल का धन्यवाद करते हैं और उस लड़के को रिहा कर देते हैं I


अकबर का बीरबल से मिलन

एक बार बादशाह अकबर अपने कुछ दरबारियों के साथ शिकार पर निकले और रास्ता भटक गए भटकते भटकते वह एक जगह पहुंची जहां पर तीन रास्ते थे लेकिन किसी को पता नहीं था कि कौन सा रास्ता आगरा को जाता है तभी उन्हें एक आदमी दिखाई दिया अकबर ने उससे पूछा कि क्या तुम्हें पता है कि यह रास्ता कहां जाता है ? वह आदमी बोला यह रास्ता तो कहीं भी नहीं जाता अकबर गुस्से में बोले क्या मतलब है तुम्हारा तुम मेरा मजाक उड़ा रहे हो .


आदमी बोला लोग जाते हैं रास्ता थोड़े ही नहीं जाता है अकबर आदमी के इस जवाब पर हंसने लगे और बोले सही कहा तुमने क्या नाम है तुम्हारा आदमी बोला मेरा नाम महेश दास है लेकिन तुम कौन हो और तुम्हारा क्या नाम है ?

अकबर बोले कि मैं हिंदुस्तान का बादशाह अकबर हूं मुझे तुम्हारे जैसे निडर और बुद्धिमान लोग ही अपने दरबार में चाहिए अकबर उसे सोने की अंगूठी उपहार में देते हैं और कहते हैं तुम यह अंगूठी लेकर मेरे दरबार में आना मैं तुम्हें पहचान लूंगा
अपने दरबार में एक स्थान भी दूंगा इस तरह महेश दास बादशाह अकबर से मिलता है और उन्हें आगरा का रास्ता भी बताता है यही महेश बाद में बीरबल के नाम से मशहूर होता है I

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कौवो की गिनती

मुगल बादशाह अपने बुद्धिमान मंत्री बीरबल के साथ बगीचे में टहल रहे थे वहां पर बहुत सारे कौवे उड़ रहे थे तभी अकबर ने बीरबल से एक पेचीदा सवाल पूछा कि राज्य में कुल कितने कौवे हैं थोड़ी देर सोचकर बीरबल बोला हुजूर हमारे राज्य में कुल 90550 हैं अकबर बोले तुम इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकते हो I

बीरबल बोला चाहे तो गिन सकते हैं अगर यदि उससे कम हुए तो इसका मतलब है कि पड़ोसी राज्य के लिए उड़ गए हैं और ज्यादा हुए तो इसका मतलब है कि पड़ोसी राज्य से कुछ कहे हमारे राज्य में आ गए हैं अकबर बीरबल के जवाब से बहुत खुश होते हैं और उसे उपहार देते हैं की बीरबल किसी भी परिस्थिति में आसानी से हल निकाल लेते है i


शिकार और दहेज

बादशाह अकबर को शिकार का बहुत शौक था एक दिन भी बीरबल को साथ लेकर शिकार पर गए वहीं पेड़ पर दो उल्लू बैठे थे और जोर-जोर से हल्ला कर रहे थे अकबर ने बीरबल से पूछा कि यह किस बात पर झगड़ रहे हैं ?

बीरबल बोला जहांपना आप वादा कीजिए कि पूरी बात सुनकर नाराज नहीं होंगे अकबर बोले बताओ ना बीरबल क्यों झगड़ रहे हैं I बीरबल बोले कि दहेज को लेकर झगड़ रहे हैं एक उल्लू दूल्हे का पिता है और एक उल्लू दुल्हन का दूल्हे का पिता दहेज में जानवरों के बिना 40 जंगल मांग रहा है दुल्हन का पिता कह रहा है कि अभी वह 20 जंगल ही दे सकता है दुल्हन का पिता 6 महीने का समय मांग रहा है 40 जंगलों के लिए उसका कहना है कि जिस गति से बादशाह अकबर शिकार कर रहे हैं उससे तो जल्द ही कोई भी जानवर नहीं बचेगा और जंगल खाली हो जाएंगे I

बादशाह को यह सुनकर बहुत ही बुरा लगता है और उस दिन से ही शिकार करना छोड़ देते हैं इस तरह बीरबल अकबर को उनकी गलती का एहसास करवा देता है I


हुजूर मैं तो आपका नौकर हूं

एक बार बादशाह अकबर और बीरबल घुड़सवारी करते पत्ता गोभी के खेत में पहुंच गए अकबर पत्ता गोभी को देखकर बोले पत्ता गोभी की सब्जी कितनी स्वादिष्ट होती है मुझे यह बहुत पसंद है बीरबल भी उनकी हां में हां मिलाते हुए कहते हैं हुजूर आपकी पसंद एकदम सही है पत्ता गोभी तो सब्जियों में राजा है I

कुछ दिनों बाद वे फिर उसी खेत से गुजरे लेकिन इस बार अकबर पात गोभी को देखते ही बोले इतनी घटिया सब्जी होती है यह पत्ता गोभी मुझे तो यह बिल्कुल भी पसंद नहीं पता नहीं लोग इसे कैसे खाते हैं बीरबल बोले जी हुजूर एकदम घटिया सब्जी है यह इसे तो देखने का भी मन नहीं करता तभी अकबर को याद आ जाता है कि पिछली बार तो बीरबल पत्ता गोभी की तारीफ कर रहे थे और इस बार यह उसे घटिया बता रहे हो I

अकबर बीरबल से पूछते हैं कि तुम्हारा क्या मतलब है बीरबल तुम पिछली बार तो कुछ और कह रहे थे और इस बार कुछ और बीरबल सिर झुका कर कहता है जहापनाह मैं आपका नौकर हूं पत्ता गोभी का नहीं ।


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एक प्रश्न

बीरबल की बुद्धिमता और हाजिर जवाबी की बातें दूर-दूर तक होती थी एक बार एक विद्वान दरबार में आए और बोले मैंने सुना है कि बीरबल जहां सबसे बुद्धिमान है मैं उसकी परीक्षा लेना चाहता हूं क्या तो वह मेरे 100 प्रश्नों का जवाब दे या फिर एक ही कठिन प्रश्न का I

अकबर और बीरबल को कहीं जाने की जल्दी थी तो बीरबल ने कहा कि एक कठिन प्रश्न पूछ लो विद्वान ने पूछा कि पहले मुर्गी आई या अंडा बीरबल बोले मुर्गी, विद्वान बोला तुम यह कैसे कह सकते हो सिद्ध करो बीरबल बोले आप को एक प्रश्न पूछना था वो आप पूछ चुके हैं तो मैं आपके और प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सकता उनकी हाजिर जवाबी और बुद्धिमता से विद्वान हतप्रभ रह गए और चुपचाप लौट गए I


birbal ki kahaniyan, छोटी रेखा

एक बार बादशाह अकबर ने चौक से जमीन पर एक रेखा खींची थी फिर उन्होंने अपने दरबारियों से कहा कि इस रेखा को छुए बिना क्या कोई इसे छोटा कर सकता है सभी सोचने लगे कि रेखा को छुए बिना भला कैसे छोटा किया जा सकता है तभी बीरबल आगे आए और उन्होंने उस रेखा के बगल में एक लंबी रेखा खींच दी और वह रेखा छुए बिना ही छोटी हो गई इस तरह बीरबल ने अकबर की रेखा को छोटा कर दिया


चोर की परीक्षा

एक बार एक धनी आदमी हसन नाम के भोले भाले आदमी पर अपनी पत्नी का हार चुराने का इल्जाम लगाता है वह अपनी शिकायत लेकर बादशाह अकबर के दरबार में पहुंचता है धनी आदमी अकबर से कहता है उसने स्वयं हसन को चोरी करते हुए देखा है हसन कहता है नहीं हुजूर मैं बेकसूर हूं मैंने कोई चोरी नहीं की है I

धनी आदमी बादशाह अकबर से कहता है कि हसन के हाथ में बहुत गर्म लोहे की छड़ी पकड़ाई जाए यदि उसने चोरी की है तो उसके हाथ जल जाएंगे और अगर वह निर्दोष है तो ईश्वर उसे कुछ नहीं होने देंगे अकबर धनी आदमी की बातों पर विश्वास कर लेते हैं और अगले दिन हसन को दरबार में पेश होकर इस परीक्षा को पास करने के लिए कहते हैं I

घबराया हुआ हसन बीरबल के पास पहुंचता है बीरबल उसे एक अच्छा सा सुझाव देकर भेज देते हैं अगले दिन जब दरबार में हसन से गर्म लोहे की छड़ी पकड़ने को कहा जाता है तो वह कहता है कि यदि अपनी सच्चाई को साबित करने का यही तरीका है तो यह तरीका इस धनी व्यक्ति पर भी लागू होता है इसलिए पहले यह गर्म छड़ी धनी व्यक्ति को दी जाए मैं इसे बाद में पकड़ लूंगा व्यक्ति यह सुनकर घबरा जाता है और कहता है कि हसन को छोड़ दिया जाए शायद उसकी पत्नी अपनी हार को कहीं रखकर भूल गई है अकबर सब कुछ समझ जाते हैं और सजा के तौर पर वास्तव में गले का हार हसन को देने के लिए कहते हैं i


वफादार माली

अकबर का मूड कुछ ठीक नहीं था इसलिए भी बाहर बगीचे में शेयर करने को निकले और वही एक पत्थर से टकरा गए उन्हें बहुत गुस्सा आया और उन्होंने उस बगीचे के मालिक को फांसी की सजा सुना दी माली से जब उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई तो वह बोला कि वह बादशाह अकबर से उनके दरबार में मिलना चाहता है I

माली को दरबार में लाया गया माली बीरबल के सुझाव अनुसार बादशाह के सिंहासन के पास पहुंचा और उनके पैरों पर थूक दिया बादशाह अकबर को बहुत गुस्सा आया और वह पूछने ही वाले थे कि उसने ऐसा क्यों किया तभी बीरबल बीच में बोले जहांपना मैंने इससे ज्यादा बदकिस्मत वफादार आज तक नहीं देखा I

आपने एक छोटी सी बात पर इसे फांसी की सजा सुनाई और यह नहीं चाहता था कि लोग आपकी पीठ पीछे आपके न्याय व्यवस्था के बारे में बातें करें इसलिए आज इतने सबके सामने इतना बड़ा जुल्म किया है ताकि सभी को इसके लिए फांसी की सजा सही लगे इसने अपना कर्तव्य निभाया है इसे फांसी के लिए भेज दिया जाए अकबर को अपनी गलती का एहसास हो जाता है और भी उसको रिहा कर देते हैं


महान भिखारी

एक दिन बादशाह अकबर बीरबल से पूछते हैं बीरबल क्या किसी व्यक्ति के लिए यह संभव है कि वह सबसे महान और सबसे छोटा दोनों एक साथ हो बीरबल कहते हैं हां जहांपना यह कहकर बीरबल बाहर जाते हैं और एक भिखारी को लेकर आते हैं बीरबल कहते हैं जहां पर आपके सामने यह सभी मायनों में सबसे छोटा है अकबर कहते हैं चलो ठीक है मान लिया कि यह भिखारी सबसे छोटा है लेकिन यह सबसे महान कैसे हुआ बीरबल बोले भिखारी की किस्मत देखिए कि सबसे बड़े मुगल बादशाह स्वयं मिलना चाहते हैं तो हुआ ना यह महान , महान बादशाह अकबर बीरबल के इस जवाब से बहुत प्रसन्न हो जाते हैं और उसे बेशकीमती उपहार देते हैं ।


अकबर का तोता

एक बार बादशाह अकबर को किसी ने बहुत ही सुंदर बोलने वाला तोता उपहार में दिया अकबर को मैं तोता बहुत ही प्रिय था उन्होंने अपने सभी सेवकों से कहा कि इस तोते का खास ख्याल रखा जाए और यदि किसी ने भी मुझे यह खबर दी कि तोता मर गया है तो उसे फांसी पर लटका दिया जाएगाI

सभी ने तोते का बहुत ध्यान रखा लेकिन एक दिन मैं तोता मर गया चाहे तो उसी फांसी पर लटका दिया जाएगा सभी ने तोते का बहुत ध्यान रखा लेकिन एक दिन वह तोता मर गया डरे हुए सेवक मदद के लिए बीरबल के पास पहुंचे बीरबल ने उन्हें समझा कर भेज दिया और कहा कि वे इस मामले को सुलझा देंगे I

बीरबल अकबर के पास पहुंचे और बोले हुजूर आपका तोता अकबर बोले क्या हुआ मेरे तोते को बीरबल हकलाते हुए बोले आप का तोता ना तो कुछ खाता है ना ही कुछ पीता है ना वह कुछ बोल रहा है और ना ही पंख खिला रहा है ना ही मैं अपनी आंखें खोल रहा है और ना ही बोल रहा ,जहापनाह क्या कहा कहीं मेरा तोता मर तो नहीं गया बीरबल मैंने कुछ नहीं कहा आपने ही कहा कि आपका तोता मर गया है अकबर समझ गए उन्होंने किसी को सजा नहीं दी और बीरबल की खूब प्रशंसा की i

बच्चो की कहानी


आचार से मिला सुराग

एक बार एक आदमी अपने परिवार के साथ तीर्थ यात्रा पर निकला उसने आचार के खाली डिब्बे में अपनी सारी जमा पूंजी डाली और उसे अपने पड़ोसी को देकर उसने कहा कि मैं उसका ख्याल रखें जब मैं तीर्थ यात्रा से लौट आएगा तब वह डिब्बा वापस ले लेगा I

जब आदमी वापस लौटा तो उसके पड़ोसी ने उसे आम के अचार से भरा हुआ डिब्बा दे दिया और बोला इसमें तो तुमने पैसे नहीं बल्कि आचार भर के ही दिया था आदमी अपने पड़ोसी को लेकर बीरबल के पास पहुंचा और सारी बात बताई बीरबल को भी पड़ोसी ने वही बात बताई इसमें तो पुरा आचार था बीरबल समझ गए इतनी आसानी से यह सच नहीं बोलेगा I

बीरबल ने अनुभवी रसोइए को बुलाया उससे अचार चक्कर बताने को कहा कि यह आचार कितना पुराना है रशोइए ने आचार को देखते ही बता दिया कि यह तो ताजा है इसे बने हुए एक महीना भी नहीं हुआ बीरबल समझ जाते हैं आदमी झूठ बोल रहा है और इस तरह वे पड़ोसी उस आदमी की सारी जमा पूंजी लौटकर उसे क्षमा मांगता है बीरबल उसे चोरी के जुर्म में सजा देते है I


अकबर का मजाक

एक बार बादशाह अकबर बीरबल से मजाक करने की एक योजना बनाते हैं बीरबल के आने से पहले ही सभी दरबारियों को एक एक अंडा दे देते हैं जब बीरबल दरबार में पहुंचता है तो अकबर कहते हैं कि उन्होंने कल रात सपने में एक दैवीय शक्ति को देखा उस दैवीय शक्ति ने कहा कि सभी मंत्रियों की ईमानदारी को जांचने के लिए उन्हें चाहे तालाब में भेजा जाए अंडा लाने को कहा जाए जो भी अंडा लाएगा ईमानदार मंत्री है और जो खाली हाथ लौटे का वह ईमानदार नहीं है I

पर सभी दरबारियों को तालाब जाकर अकबर द्वारा दिया अंडा ही लेकर दरबार में पहुंचते हैं जो बादशाह ने उन्हें पहले दे दिया था लेकिन बीरबल काफी देर तक अंडा ढूंढते हैं लेकिन उन्हें वहां कुछ नहीं मिलता I
समझ जाते हैं कि यह बादशाह की कोई चाल है थोड़ी देर बाद कुछ विचार करने के बाद बीरबल मुर्गे की आवाज निकालते निकालते दरबार में पहुंचता है उसे कहते हैं कि यह चिड़चिड़ी आवाज मत निकालो चुपचाप अंडा दो बीरबल हंसते हुए कहता है मैं तो नर हूं और अंडे तो मादा देती है अकबर यह सुनकर जोर से हंसने लगते हैं और समझ जाते हैं कि बीरबल की बुद्धिमानी को मात देना आसान नहीं है I


ऊंट की टेढ़ी गर्दन

एक बार बादशाह अकबर बीरबल की होशियारी और हाजिर जवाबी से बहुत खुश हुए और उन्होंने बीरबल को बहुत सारे महंगे तोहफे देने का वादा किया कई दिन बीत गए लेकिन अकबर ने अपना वादा पूरा नहीं किया 1 दिन बादशाह अकबर बीरबल के साथ यमुना के किनारे सैर पर निकले तभी उनकी नजर ऊंट की मुड़ी हुई गर्दन पर पड़ी I

अकबर ने बीरबल से पूछा, ऊंट की गर्दन मुड़ी हुई क्यों है ? सोच कर बोला लगता है कि इस ऊंट ने किसी से किया गया वादा नहीं निभाया है शास्त्रों में भी लिखा है कि जो अपना वादा पूरा नहीं करते उनकी गर्दन मुड़ जाया करती है I अकबर को एहसास हो जाता है कि उन्होंने भी अपना वादा पूरा नहीं किया है जैसे ही वे महल पहुंचते हैं बादशाह अकबर-बीरबल को खूब सारी महंगे तोहफे देते हैं इस तरह बीरबल ने बिना कुछ कहे वह पा लिया जो वह चाहता था I


अकबर के पांच प्रश्न

एक बार बादशाह अकबर जब दरबार में पहुंचते हैं तो उनके मन में पांच प्रश्न आते हैं अपने दरबारियों की बुद्धि की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनका उत्तर मागते हैं उनके पांच प्रश्न कुछ इस प्रकार है पहला प्रश्न- कौन सा फूल सबसे अच्छा है ? दूसरा प्रश्न- किसका दूध सबसे अच्छा है? तीसरा प्रश्न- सबसे ज्यादा मीठा क्या है? चौथा प्रश्न- कौन सा पत्ता सबसे अच्छा है? और पांचवा प्रश्न- कौन सा राजा सबसे अच्छा है?

सभी दरबारी अलग-अलग उत्तर देते हैं कोई कहता है गुलाब का फूल अच्छा है कोई गाय का दूध सबसे अच्छा मानता है कोई मिठाई कोई गन्ने का रस तो कोई अनार को मीठा बताता है कुछ लोग केले के पत्ते और कुछ नीम के पत्ते को अच्छा बताते हैं लेकिन आखरी प्रश्न का उत्तर सभी दरबारी एक साथ देते हैं और कहते हैं बादशाह अकबर ही सबसे अच्छे राजा है उनकी वफादारी से खुश होते हैं लेकिन संतुष्ट नहीं होते I

तभी बीरबल बहाते हैं और प्रश्नों के जवाब कुछ इस प्रकार देते हैं जूही का फूल सबसे अच्छा है क्योंकि उसे कपड़े बनते हैं और सभी उसे पहनते हैं मां का दूध सबसे अच्छा है जिसे पीकर बच्चे स्वस्थ और तंदुरुस्त बनते हैं सबसे मीठी कोई मिठाई नहीं बल्कि जुबान होती है मीठे बोल बोल कर सबको अपना बनाया जा सकता है सबसे अच्छा पत्ता पान का है इसे खाकर दुश्मन भी मित्र बन जाता है सबसे अच्छे राजा इंद्र है क्योंकि उनकी कृपा से ही वर्षा होती है वर्षा होने के कारण ही किसान खेती करते हैं और सब का पेट भरता है बीरबल के जवाब को सुनकर बहुत खुश होते हैं और संतुष्ट होकर उसे कई उपहार देते हैं I

बीरबल की हाजिरजवाबी

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अकबर-बीरबल की कहानियां

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