समय की परिभाषा एक कवि की भाषा में

समय की परिभाषा?? समय क्या है ? समय का अर्थ क्या है ? आप के सभी सवालो का जवाब एक कवी चासनी में

बहुत लम्बे वक्त से समय के बारे मे सोचता हूँ कि आखिर
समय किसे हम कहते है ओर यह वक्त अच्छा या खराब
भी हो सकता है ओर इस इकाई का प्रभाव कहाँ ओर
कैसे होता हे ओर इसका आँकलन कैसे किया गया ओर
क्या यह सब केलिय एक समान कार्य करता हे
कारण ओर इफेक्ट मे समय का प्रभाव कैसे हो सकता हे
क्या हम अतीत मे सफर कर सकते हे..
ऐसे तमाम ओर प्रश्न हे जिसे मे केवल लिपीबद्भ कर के
यहाँ लिख रहा हूँ:-


आइये पहले हम यह समझते है कि समय को कब से
हम पहचानने लगे है यह तो हम जानते ही है कि घडी
का उपयोग हम कब से कर रहे हे मुझे इसके मकेनिज्म
मे कतेई दिलचस्पी नही हे लेकिन एक प्रश्न जरूर आता
हे कि सैकड़ की माप किस आधार पर तय की गयीं होगी
इस सैकड़ को कैसे बाँटा गया होगा क्या इस माप का
संगत प्रभाव प्राकृतिक है …

इस सैकड़ की माप को हमने सेकंड समय की मानक अंतर्राष्ट्रीय (SI) इकाई मे माना है। एक सेकंड वह समय है जो लिया गया हे ऐसे परमाणु मे जिसके इलेक्ट्रॉण 9,192,631,770 (9.192631770 x 10 9) चक्कर पूरा
करता हे उसे हमने एक सैकड़ माना है चक्रवात 133 परमाणु के दो स्तरों के बीच संक्रमण द्वारा उत्पन्न विकिरण के चक्रों के दौरान समाप्त होता है। दूसरे के लिए अन्य भाव हैं।

समय का अर्थ

तो इसप्रकार से समय ओर कैलैंडर अपने सापेक्ष बनाया गया
फिर थोडी समझअनुसार प्रकाश वर्ष ओर केई यूनिट मानी गयी…….
लेकिन मूल प्रश्न यह कि यह होता क्या है:-

वैझानिक समझ से कहे तो यह स्पेस टाईम से मिलकर
एक चादर बनी है जो संपूर्ण ब्रह्माण्ड मे फैली हे जी
हाँ जब भी हम समय की बात करते हे तो वहाँ स्थान
सवयम ही जुड जाता हे समय ओर स्थान दोनो छोटे
छोटे फेबरिक मे आपस मे गुंथे हुए है एक को जब हम
मापते है तो दूसरा वही अदृश्य उपलब्ध हैं……

खैर अब आप साधारण भाषा मे समझे तो
“परिवर्तन की दर” को हम समय कहतें है जैसे हम
किसी एक बिंदु या स्थान से दुसरे बिंदु पर पहुचे मे लगा
“समय” कहलाता है ओर उसमे विशेष ध्यान यह भी कि हमारा यह परिवर्तन कभी भी वापस नही होता इसीलिए समय कभी
पीछे नहीं हो सकता जो परिवर्तन होगया वह होगया समय ओर
स्थान सदैव आगे फैलते है
यानी जो जगह आपसे छूट चूकी
या आप खुद आगे निकल आये फिर उस जगहों को आप नही
पकड सकते जैसे यदि मै आप को अपना कमरा घूमाऊ ओर
थोडी देर के बाद दोबारा वही कमरे मे लाऊ तब भी आप उस समय के कमरे मे नही पहुंच पाये क्योकि वहाँ कमरे के परिवर्तन या समय माप हो चुकी ओर उस कमरे की घडिय़ाल ने अपनी सूईयाँ मे परिवर्तन कर लिया है….

अर्थात समय अदृय इकाई हे केवल घटना हमारे बीच निश्चित समय मे परिवर्तन है अब वह हमारी सोच केअनुसार अच्छा हो
या बुरा तो आप यह किसी से सुने कि वक्त बहुत खराब चल रहा हे तो इसके यह मायने नही की वह समय कर रहा हे
समय अच्छा या बुरा कभी नही होता वह तो केवल एक माप हे जिस के साथ फेबरिक मे जगह हमेशा जुडी रहती हे ।इसका सीधा संदेश हे कि जो उस समय हमारे जीवन मे परिवर्तन हो रहा हे वह खराब या अच्छा हे …

तो जब हमारा यह ब्रह्मांड वजूद मे आया तभी समय पैदा हुआ
या यूँ कह लो कि परिवर्तन ना केवल अति सूक्ष्म जगहों पर ही नही अपितू अति विराट दूरियों तक परिवर्तन(समय) सरववयापी पाया गया ….
तो प्रश्न यह की क्या कुछ ऐसा भी है जो समय से मुक्त हो
या जिसे हम शाश्वत कहें??
विषय बहुत गंभीर ओर लंबा हे तो आप आगे साथ बने
रहें……….. क्रमशः


समय की परिभाषा??


पिछले भाग में शाश्वत के वजूद की बात पर विचारों की थी अर्थात हमारे बीच ऐसा भी कुछ है जिस पर समय धारा का कोई प्रभाव नहीं हो,या उस पर परिवर्तन नहीं होता?
हम में से बहुत से ईश्वर की ओर इशारा कर देंगे पर मुझे इस बात पर इत्तेफाक हर्गिज नही हे क्यो कि ईश्वरीय बोध इस के भी केई पायदान आगे है।जब तक उन की उपस्थिति
तय नहीं होती, वैसे बहुत से सावृत्रिक कण है जिसमे आज तक कोई परिवर्तन नही है तो वह शाशवत कहने योग्य है
जैसे प्रकाश,प्रकाश की चाल,फोटान,प्लाँक नियताँक, सावृत्रिक गुरुत्वाकर्षण, इलेक्ट्रॉन पर आवेश…..


ऐसे बहुत से घटक हमारे बीच हे जो समय से मुक्त है
जिन का मूल्य आज तक अपरिवर्तनीय हे ओर यह भी
उतना ही बढा सत्य हे कि इन के मानको में जब भी जरा
भी परिवर्तन हुआ या समय प्रभाव पढा तो हमारा ब्रह्मांड
अपने मे ढह जायेगा सारा पर्दाथ खत्म हो जायेगा

यह भी हमारे जैसी सभ्यता को विकसित होने मे मिला समय ओर आप जैसे का आना वा समझ इन्ही के शाश्वत होने के कारण से संभव हुआ हे अर्थात यह कि इन्हें समय के प्रभाव से मुक्त रखने के कारण ब्रमांड मे होनेवाले कारण का इफेक्ट्स ब्रमांड में हर जगहों पर उपस्थित मिलता है मतलब हम आप जिसभी कमरें मे जितनी ही दूरी पर उपस्थित है एक दूसरे से जुडें है ओर स्पष्ट इस तरह
समझे की इन मानको को आदेश मिले की अठारह हमशकल
अलग अलग प्रकाश वर्ष दूरियो पर चाहिए तो वह सब संभव हे
हमारे एक ही वयक्ती अथवा वहीं शख्सियत केई स्थानो पर
संभव है

असल में हम सब किसी ओर के कारणो के इफेक्ट्स
है जो एक ही रुप मे केई स्थानो पर वयक्त है!!
यानी हमारे मूल कणो मे जरा भी परिवर्तन ब्रमांड के हर स्थान
पर समान प्रभाव डालें गा!!

अब का कोई अर्थ नहीं है – अब नहीं है
भौतिक विज्ञान के पास स्वयं कोई समय नहीं है, समय कहाँ के
परिवर्तन से आता है?
समय का हमारे चेतन अनुभव के साथ क्या करना है?
मौलिक रूप से इस खेल को कालातीत वास्तविकता से, हम समय की समाप्ति कैसे प्राप्त करते हैं?

हमारे लिए यह जो दुख और आनंद से गुजरने का समय है
इस से मुक्त होने के उपाय ही हमारा चरम अधयात्म ही साधन
बनेगा!!

मस्तिष्क-केवल विचारधारा स्कूल के अनुसार, :-
हम में से प्रत्येक अपने स्वयं के बीज (या स्ट्रिंग सिद्धांत में तार) के अधीन हैं, एक समय झरने की तरह है जो बेहद मजबूत है कि हम किसे पसंद करते हैं या नहीं।
समय हमारे लिए बीज की सीक्वेंसिंग के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता है, जहां से हम अपने दुख या आनंद का अनुभव करते हैं।
विषय गंभीर हे,जो भी मित्र को यह लेख रुचि कर लगे वह
इसका पहले का भाग भी देखे अगर कुछ कहें तो ओर भी अच्छा ।यह अभी बहुत लम्बा होने वाला हे……….क्रमशः
“समय की परिभाषा”
पिछले भाग में हमने यहां यह जानने की कोशिश थी कि समय होता क्या है?
इस भाग को आगे ले चलने से पहले एक ऐसे प्रश्न पर विचार कर ले कि “क्या समय सब केलिय समान है”
या सबके समय मूल्य अलग-अलग हे।
(जैसे एक्स का दिन चोबीस घंटे का है ओर वही वाई का दिन तीस घंटे ओर जेडको तो दिन का समय केवल बीस घंटे का ही हे)
जी सामान्यतः हम सबका मानना हे कि हम सबको समय(परिवर्तन की दर) समान रुप से मिलती हे लेकिन यह
अवधारणा बिल्कुल गलत हे (इशारा बायलाजिकल क्लाक भी)
“हम सब को अलग- अलग Space-time मिला हुआ हे “


आइये पहले इसे अपने प्रयोग से समझते हे हमारे पृथ्वी पर
एटामिक घडी की साल मे जो माप मिलती हे वही पृथ्वी के
बाहर पृथ्वी की कक्षा मे घूम रहे उपग्रह के समय से कुछ
सैकड़ पीछे हो जाती हे जिसे हमे हर साल ठीक करना
पढता हे…..(यानी कक्षा की अपेक्षा पृथ्वी पर समय धीमा
चलता हे )
यानी जहाँ अधिक भार या गुरुत्व बल पडता हे वहाँ समय
धीमा पढ जाता हे,मतलब अगर परिणाम पर जायेंगे तो
हतप्रथ होंगे कि अगर अपने बायलाजिकल समय को धीमा
करना हे या उम्र घटानी हे तो किसी भारी स्थान मे चले जाये
आपकी परीवर्तन की दर घट जायेगी यानी अपना समय बढा लेंगे…..

खैर समय हर जगहों पर समान नही चलता वह भिन्न भिन्न होता हे ओर वह छोटे छोटे समय आकाश फेबरिक की चादर
अंतरिक्ष मे फेली हे ओर यह भी कि यदि आप किसी दुर्घटना के शिकार ना हो तो आप अपने आकाश-समय को अंतरिक्ष के किसी भी कोने मे ले जा सकते हे जिसे आप माइग्रेट करने से समझ सकते है लेकिन शायद किसी टक्कर के बाद यह इजाजत नहीं मिलती।
( जैसे आप अपनी कार मे जाये ओर
उसमे ढेरो गुब्बारे रख ले लेकिन जैसे ही आप कहीं टकराव
करते हे तो आप की कार मे रखे गुब्बारे ओर आप
स्पेस-टाइम अंतरिक्ष मे बिखर जाते है)


इस घटनाक्रम के अलावा भी अपने समय को समय- गति से कम किया जा सकता हे आप जितना तेज भागे गे आपका
समय दूसरों के सापेक्ष घटेगा।इस घटनाक्रम को एक दूसरे
प्रयोग से समझते हे :-
जब आप समुद्र किनारे शाँत बैठे हो
तो आप समुद्र की लहरें को देखते ओर गिनते है यानी लहरों
के प्रति पल गति परिवर्तन को साधते है अब अगर मे यह
प्रश्न आप से करू कि आप उस लहरों की गति के बराबर
दोडते हो तो समुद्र कैसा दिखाई देगा??
जरा सोच के बताये?

जिस मित्र कोयह विषय रुचिकर लगे वह इससे पहले
लिखे दो भाग क्रम से अवशय पढे क्योकि आगे यह
ओर भी रोचक होने वाला हे!!

विषय गंभीर ओर लंबा हे क्रमशः

समय की परिभाषा?? समय क्या है ? समय का अर्थ क्या है ? प्रोफेसर राजीव अरोडा द्वारा लिखित है |

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