बंदर की कहानी | बंदर और मगरमच्छ |बंदर और चिड़िया | बंदर और शेर की कहानी

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बंदर और चिड़िया की कहानी –

जंगल में एक विशाल आम का पेड़ था उस पेड़ पर एक बंदर और चिड़िया दोनों रहते थे | दोनों में बड़ी मित्रता थी लेकिन चिड़िया घमंडी थी बंदर को कभी कभी भला-बुरा कह देती थी और बिचारा बंदर सुन कर शांत हो जाता था |

बंदर दिन भर शाखाओं पर इधर उधर झूलता रहता था जिससे कोई और पशु-पंक्षी उस पेड़ पर बंदर के डर से  नहीं जाते थे |

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एक दिन चिड़िया बंदर की उछल-कूद देखकर बंदर को अन्य जानवरो के सामने भला-बुरा कहने लगती है कि ?

तुम देखने में जैसे कुरूप और भद्दे हो और तुम्हारी आदतें भी वैसी ही है | बंदर की बेइज्जती देख अन्य जीव प्रसन्न हो जाते है !

 और चिड़िया ने कहा : मैं तुम जैसे नवटंकीबाज के साथ नहीं रहना चाहती | फिर क्या चिड़ियाँ उस पेड़ को छोड़ कर पास में ही दूसरे पेड़ पर नया घोसला बना लेती है और वही रहने लगती है | बंदर अब अकेले रहता था और उदास भी रहने लगा उस चिड़िया को दूसरे पेड़ पर  देख कर और दुखी हो जाता था   |

महीनों बाद उस चिड़ियाँ ने दो अण्डे दिए और अपने घोसले में ही रहने लगी | बंदर को कई दिनों तक चिड़िया दिखाई नहीं दी बंदर बहुत चिंता में पड़ गया | अगले दिन बंदर ने चिड़ियाँ का हाल-चाल जानने की कोशिश की और उसके घोसले के पास गया पर चिड़िया नहीं थी वहां  बस अंडे पड़े थे जिसे देख बंदर सोचने लगा |

तभी चिड़ियाँ आ जाती है और जोर-जोर से चिल्लाने लगती है चोर-चोर मेरे अंडे चुराने आया है आज फिर बिना सोचे समझे ही चिड़ियाँ ने बंदर को अपमानित कर दिया | अब बंदर को सभी जानवर अंडा चोर कहकर बुलाने लगे |

लगभग ७ दिनों बाद दोपहर का समय था जंगल में सन्नाटा था चिड़िया अपने घोसले में अंडो पर बैठी थी तभी अचानक कौओ एक झुण्ड उस पेड़ पर आकर बैठता है | कौवो की नजर उस चिड़िया के अंडो पर पड़ती है उन्हें अब इससे अच्छा भोजन कहा मिलता |

चिड़िया कुछ समझ पाती तब तक कौवो ने चिड़िया पर हमला कर दिया चिड़िया चिल्लाने लगी बचाओ – बचाओ | बंदर के कानो में आवाज पड़ते बन्दर दौड़ा और कौवो को मार के भगा दिया |

लेकिन चिड़िया का एक अंडा कौवे खा गए लेकिन चिड़िया और एक अंडा अभी भी सुरक्षित था | आज चिड़िया को अहसास हो गया की मैं बन्दर के कारण ही उस पेड़ पर सुरक्षित थी | और वन बन्दर के पैरों पर गिरके बंदर से माफ़ी मांगती है और उसके साथ फिर से हँसी-ख़ुशी रहने लगी |

निष्कर्ष- बिना सोचे समझे अचानक गुस्से में फैसला नहीं लेना चाहिए |    

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