गंणतंत्र दिवस पर एक कवि विचारधारा

गंणतंत्र दिवस के कुछ अनसुलझे जवाब कवियो की सब्दावली में |

सभी देश वासियों को गंणतंत्र दिवस पर
ढेरों शुभ कामनाएँ…


आप सभी विविधताओं वालों देश वासियों को बधाई इसिलिए कि आज भारत देश का संविधान लागू किया गया था…
यह हम सब भारतीयों केलिय बेहद गर्व की बात है ओर उन
सभी केलिय महत्त्वपूर्ण जो इस संविधान का सम्मान करतें हे
ओर उनकेलिए भी जो संविधान के विषय मे जो उन पर लागू कियाहे विशेष समझ नही रखते हे मगर वह सब जोश ओर देश प्रेम से भावाविभोर है…


आज मन कर आया कि आज के दिन की विशेषताओं ओर गुण वा आजादी की पृवृती पर नजर ओर बोध बनायें आज आप सब को कुछ संविधान के बनने से ले कर आगे कु जिम्मेदारी पर दृष्टि डालने की जरूरत हे….
सब से पहले वह वाकया जानते हे जिस क्षणो मे हमारा संविधान लिखा गया जो बढी विचित्र परिपेक्ष्य में हमारे संविधान को लिखा गया था….
जिसका जिक्र यहाँ करना चाहूँगा हम मे से बहुत इस बारे मे कैसे जान सकते हे जबकि लिखने से ले कर लागू होने तक के संविधान के सफरनामा का कोई उल्लेख नहीं किया गया था
पहले समझियेगा मेरे देश की आत्मा के वास को जहाँ वह बसती हे इस कविता के बाद जानते हे इतिहास:-

^ऐ मेरे भारत^
“परी हो तुम गुजरात की, रूप तेरा मद्रासी !

सुन्दरता कश्मीर की तुम में, सिक्किम जैसा शर्माती !!
.
खान-पान पंजाबी जैसा, बंगाली जैसी बोली !

केरल जैसी आंख तुम्हारी, है दिल तो तुम्हारा दिल्ली !!

महाराष्ट्र तुम्हारा फ़ैशन है, तो गोवा नया जमाना !

खुशबू हो तुम कर्नाटक की, बल तो तेरा हरियाणा !!

सीधी-सादी उड़ीसा जैसी, एम.पी. जैसा मुस्काना !

दुल्हन तुम राजस्थानी जैसी, त्रिपुरा जैसा इठलाना !!

झारखंड तुम्हारा आभूषण, तो मेघालय तुम्हारी बिन्दीया है !

सीना तुम्हारा यू.पी है तो, हिमाचल तुम्हारी निन्दिया है !!

कानों का कुंडल छत्तीसगढ़, तो मिज़ोरम तुम्हारी पायल है

बिहार गले का हार तुम्हारा,
तो आसाम तुम्हारा आंचल है !!

नागालैंड- आन्ध्र दो हाथ तुम्हारे, तो ज़ुल्फ़ तुम्हारा अरुणाचल है !

नाम तुम्हारा भारत माता,
तो पवित्र तुम्हारा उत्तरांचल है !!

सागर है परिधान तुम्हारा,
तिल जैसे है दमन-द्वीव !

मोहित हो जाता है सारा जग,
रहती हो तुम कितनी सजीव !!

अंडमान और निकोबार द्वीप,
पुष्पों का गुच्छ तेरे बालों में !

झिल-मिल, झिल-मिल से लक्षद्वीप, जो चमक रहे तेरे गालों में !!

ताज तुम्हारा हिमालय है,
तो गंगा पखारती चरण तेरे !

कोटि-कोटि हम भारत वासियों का,

स्वीकारो तुम नमन मेरे !!
जय हो मेरे भारत की।….

       * भारत माता की जय।*

आये इस संविधान के लिखते वक्त कैसा मंजर था वह देखतें हे
जब संविधान लिखने ओर लागू का अवसर आया तब प्रश्न यह था कि इसे लिखे गा कौन
आप को यह जान कर बढा आश्चर्य होगा कि जब अपना संविधान मे डाक्टर राजेंद्र प्रसाद ने भीम राव अंबेडकर जी के साथ मिले ओर पूछा कि कया यह आपने पढाहे ओर इसे कैसे लिखा जाना हे..


उस वक्त दोनों की चेतनता संविधान की विराटता को सोच कर कोसों दूर छली गयी जिस पर भीमराव जी ने यह कहा कि हाँ मैने ब्रिटिशों के संविधान को एक बार तो पढा है इस पर जब उसे कलमबद्ध करने की बारी आयी तबतो सब से पहले उन्होने चेतन चुरण बनाने की बात की गयी थी (खैनी)तब राजेंद्र जी ने पहले चेतन चूरण बनाया ओर दोनो ने ग्रहण कर के अपनी चेतनता….
आने पर कहा कि हाँ मैने एक बार पढा तो है
तब यह डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के द्वारा बयाखित ओरभीम अंबेदकर जी के द्भारा लिपीबद्भ रचित संविधान दर्ज किया गया था…
जिस संविधान पर हम आज बहुत नाज करते हे वह हमारे झान की या हमारे बोध की देन ना कहे अपितू वह एक फोटोकापी थी जो ब्रिटिश की देन थी


वैसे आप सब को यह बता दें कि हमारा संविधान हूबहू अंग्रेजों द्भारा गठित की नकल मात्र हे ओर ताजुब देखिये हम हिदुस्तान मे आज भी उन्ही के संविधान को लागूकिया हुआ हे हैरत हे कि उनके एक भी नियमित धाराओ को बदल नही कर पाये हे भले ही उनमें कितनी मौलिक विकार उपस्थित है ?तो क्या यह संविधान आज भी कुछ चंद मुठ्ठी भर लोगों की विरासत भर है?हम आज भी उसी मूल संविधान मे अपने हिसाब से संशोधित कर के अपना देश को पुरानी वेग से ही धकेल रहे है जरा सोचे जो ढेड सो साल पहले कानून ओर लोगों के प्रति न्याय था वही आज के परिपेक्ष्य मे भी वही कानून ओर सजाये है??

तो क्या इसे बदलाव की बयार नही होनी चाहिए आज हमे आनंद के साथ साथ सुधार ओर नये जरूरी उपायो के बारे मे सोचना ओर लागू करना न्याय होगा
अगर विषयवस्तु अच्छी लगे तो इसके आगे जाने की संविधान
वास्तव मे क्या है ओर यह किसतरह से सदैव आंशिक हाईजैक रहा है।

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